world news : पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक अहम रक्षा समझौता हुआ था, अब इसमें तुर्की शामिल होना चाहता है। पाक और सउदी अरब के बीच समझौते को स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट नाम दिया गया। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद और पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ के बीच कुछ महीने पहले ही यह समझौता हस्ताक्षरित हुआ। इस दौरान पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी मौजूद रहे। इस डिफेंस गठबंधन के तहत दोनों में से किसी भी देश पर आक्रामकता को दोनों देशों पर आक्रामकता माना जाएगा और दोनों देश मिलकर रक्षा क्षेत्र में काम करेंगे। पाकिस्तान और सऊदी अरब के इस डिफेंस गठबंधन में एक अन्य देश भी शामिल होना चाहता है।
तुर्की ने जताई शामिल होने की इच्छा
तुर्की ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के डिफेंस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस संबंध में तीनों देशों के बीच बातचीत जारी है। गौरतलब है कि तुर्की के पाकिस्तान और सऊदी अरब से काफी अच्छे संबंध हैं।
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क्या है तुर्की का मकसद?
पाकिस्तान और सऊदी अरब के डिफेंस गठबंधन में शामिल होने के पीछे तुर्की का मकसद तुर्की की क्षेत्रीय सुरक्षा मज़बूत करना हो सकता है क्योंकि किसी भी देश पर हमला होने पर अन्य देश उसकी मदद करेंगे।
ताकतवर डिफेंस ब्लॉक बन सकता है
अगर तुर्की पाकिस्तान और सऊदी अरब के इस डिफेंस गठबंधन में शामिल हुआ, तो तीनों देशों को इसका फायदा मिलेगा। सऊदी अरब के पास बेशुमार धन है। पाकिस्तान के पास परमाणु शक्ति है। तुर्की की सैन्य शक्ति काफी मज़बूत है। तीनों के एक साथ आने से एक ताकतवर डिफेंस ब्लॉक बनेगा जो सैन्य नज़रिए से तीनों देशों के लिए काफी अहम होगा। हालांकि इससे कुछ हद तक भारत की चिंता बढ़ सकती है।
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