Jaipur: राजस्थान में एक हजार से अधिक सरकारी स्कूल ख़स्ता-हाल हैं, बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। राज्य में भजनलाल सरकार ने 1154 सरकारी विद्यालयों को जर्जर घोषित कर दिया है। सरकार ने तो घोषित कर दिया लेकिन अब समस्या बच्चों और अभिभावकों के सामने खडी हो गई है। बच्चों को पास के स्कूल में शिफ्ट किया है लेकिन यह पास का स्कूल कई जगहों पर तीन से चार किलोमीटर दूर है जहां आने जाने के साधन नहीं है। शिक्षा विभाग का भी कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, जबकि इस फैसले से ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पर असर पडने की संभावना बन गई है।
मर्ज हुए स्कूलों में अलग-अलग शिफ्ट
शिक्षा निदेशालय बीकानेर की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जर्जर भवनों में चल रहे विद्यालयों के विद्यार्थियों को पास के सुरक्षित विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कई स्थानों पर महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को 2 पारी में संचालित किया जाएगा. एक ही विद्यालय भवन में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की कक्षाएं अलग-अलग शिफ्ट में चलेंगी, जिससे भवन की क्षमता के अनुसार, विद्यार्थियों को समायोजित किया जा सके.
ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों पर असर
इस व्यवस्था का सीधा असर ग्रामीण बच्चों पर पड़ रहा है. कई गांवों में जर्जर घोषित स्कूल बंद होने के बाद विद्यार्थियों को 5 से 6 किलोमीटर दूर दूसरे गांव या कस्बे के स्कूल में भेजा जा रहा है. परिवहन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण छोटे बच्चों को पैदल या निजी साधनों से जाना पड़ रहा है. अभिभावकों का कहना है कि इतनी दूरी तय करना प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए ना केवल मुश्किल है, बल्कि जोखिम भरा भी है.
स्कूलों को 2 पारी में चलाने के निर्णय से चिंता
महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को 2 पारी में चलाने के निर्णय ने भी अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. कई जगह सुबह एक शिफ्ट में प्राथमिक कक्षाएं और दूसरी शिफ्ट में उच्च प्राथमिक कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, इससे बच्चों का स्कूल समय पूरी तरह बदल गया है. कहीं बच्चों को बहुत सुबह घर से निकलना पड़ रहा है, तो कहीं देर शाम तक स्कूल में रुकना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू माहौल तीनों प्रभावित हो रहे हैं.
बेटियों के लिए दूरी बन रही बाधा
ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल मर्ज होने के बाद पढ़ाई की निरंतरता टूट रही है. खासकर बेटियों के मामले में दूरी एक बड़ी बाधा बन रही है. कई परिवारों ने आशंका जताई है कि यदि यही स्थिति रही तो बच्चों को ड्रॉपआउट करना पड़ेगा, और सरकारी स्कूलों से भरोसा और कमजोर होगा.
यह भी पढ़ें : राजस्थान की पीटीआई भर्ती में गड़बड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार ने किया एक्शन, फर्जी डिग्री पर बड़ा खुलासा
पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी असर
आदेश में यह भी उल्लेख है कि जर्जर भवनों वाले विद्यालयों के शिक्षकों को भी मर्ज किए गए स्कूलों में समायोजित किया जाएगा, और वहां उपलब्ध संसाधनों के अनुसार शिक्षण कार्य कराया जाएगा, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिन स्कूलों में पहले से ही विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त बच्चों के आने से कक्षाओं में भीड़ बढ़ रही है, और पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है.
बच्चे और अभिभावक भुगत रहे खामियाजा
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई स्कूल भवन ऐसे थे, जिनकी मरम्मत संभव थी. यदि समय पर बजट जारी कर मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाता तो बच्चों को गांव छोड़कर दूर नहीं जाना पड़ता. उनका आरोप है कि भवन सुधार के बजाय स्कूल मर्ज करना आसान रास्ता चुना गया, जिसका खामियाजा बच्चे और अभिभावक भुगत रहे हैं.
साथ ही महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को 2 पारी में चलाने के फैसले की समीक्षा कर एक पारी में संचालन की व्यवस्था की जाए, जिससे ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उन्हें घर से दूर जाने को मजबूर न होना पड़े.
यह भी देखें : Jaipur Army Day Parade 2026 | जयपुर में पहली बार सेना की भव्य परेड | Exclusive Report



