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Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी व्रत में इन 4 भूलों से बचें, तभी मिलेगा पूजा का पूरा फल

Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी व्रत में इन 4 भूलों से बचें

भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत पावन माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि‑विधान से पूजा और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख‑समृद्धि की प्राप्ति होती है। हालांकि, कुछ छोटी‑सी भूलें व्रत और पूजा के फल को निष्फल कर सकती हैं। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन इन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 जनवरी 2026 को सुबह 08:23 बजे शुरू होकर 11 जनवरी 2026 को सुबह 10:20 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर वर्ष 2026 की पहली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शनिवार, 10 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां

1. तुलसी के पत्ते न तोड़ें

भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। पूजा के लिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़ लें। इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और दीपक जलाएं, परंतु पौधे को नुकसान न पहुंचाएं।

2. तामसिक भोजन और नशे से रहें दूर

जन्माष्टमी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और शरीर की शुद्धि का पर्व है। इस दिन प्याज, लहसुन, मांसाहार और शराब जैसे नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाएं, अन्यथा व्रत खंडित माना जाता है।

3. गायों का अपमान न करें

भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल कहा जाता है। ऐसे में गाय या बछड़े का अपमान करना, उन्हें भूखा रखना या भगाना पूजा के फल को कम कर देता है।
पुण्य कार्य: इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. मन में क्रोध और द्वेष न रखें

व्रत के दौरान केवल शरीर ही नहीं, मन की शुद्धि भी जरूरी है। किसी से झगड़ा करना, क्रोध करना या अपशब्द कहना व्रत के प्रभाव को कम कर देता है। शांत मन, मधुर वाणी और सकारात्मक सोच के साथ पूजा करें।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, करुणा और धर्म का प्रतीक माना गया है। हर महीने आने वाली यह अष्टमी हमें यह स्मरण कराती है कि सच्ची भक्ति से भगवान को हमेशा अपने जीवन में महसूस किया जा सकता है। मान्यता है कि मासिक जन्माष्टमी के दिन विधिपूर्वक पूजा करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और जीवन की समस्याओं से राहत मिलती है।

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