Apple के पहले मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट Vision Pro को लेकर कंपनी की बड़ी उम्मीदों को झटका लगता नजर आ रहा है। महंगे दाम और सीमित यूजर बेस के चलते इस डिवाइस की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई है। कमजोर डिमांड के संकेत मिलने के बाद Apple ने इसके प्रोडक्शन और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है।
मैन्युफैक्चरिंग और ऐड बजट में कटौती
उद्योग से जुड़े संकेतों के अनुसार, Apple ने Vision Pro की मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार धीमी कर दी है। शुरुआती महीनों में सीमित संख्या में ही यूनिट्स बाजार में भेजी गईं और अब नए प्रोडक्शन ऑर्डर भी कम कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में डिजिटल विज्ञापनों पर होने वाला खर्च भी लगभग खत्म कर दिया गया है।
बिक्री उम्मीदों से काफी नीचे
हालांकि Apple ने Vision Pro की आधिकारिक बिक्री संख्या साझा नहीं की है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक इसकी शिपमेंट काफी सीमित रही है। 2025 के अंत तक इसकी डिलीवरी और भी कम होने की संभावना जताई जा रही है। iPhone और Mac जैसे Apple के अन्य प्रोडक्ट्स की तुलना में Vision Pro की बिक्री बेहद कम मानी जा रही है।
सीमित देशों तक ही सिमटा Vision Pro
3,499 डॉलर की शुरुआती कीमत वाला यह हेडसेट फिलहाल चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है। साल 2025 में किसी नए मार्केट में इसके लॉन्च की घोषणा नहीं हुई है, जिससे साफ है कि Apple फिलहाल इसके ग्लोबल एक्सपेंशन को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है।
ज्यादा कीमत और ऐप्स की कमी बनी बड़ी बाधा
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Vision Pro की धीमी लोकप्रियता के पीछे इसकी ऊंची कीमत, भारी डिजाइन और सीमित ऐप इकोसिस्टम अहम वजह हैं। फिलहाल VisionOS के लिए कुछ हजार ऐप्स ही उपलब्ध हैं, जो आम यूजर्स को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा रहे।
VR इंडस्ट्री पर भी दिख रहा असर
पूरे VR और मिक्स्ड रियलिटी मार्केट में भी फिलहाल गिरावट देखने को मिल रही है। ग्लोबल लेवल पर VR हेडसेट्स की मांग कमजोर हुई है, जिससे Apple समेत अन्य कंपनियों की रणनीतियों पर असर पड़ा है। हालांकि, एंटरप्राइज सेगमेंट जैसे ट्रेनिंग, हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल यूज में Vision Pro को कुछ हद तक अपनाया जा रहा है।
आगे की रणनीति पर काम कर रही Apple
Apple अब इस टेक्नोलॉजी को नए रूप में पेश करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ज्यादा हल्के, सस्ते और कंज्यूमर-फ्रेंडली डिवाइस पर काम कर सकती है। इसके साथ ही, स्मार्ट ग्लासेस जैसे नए प्रोडक्ट्स पर निवेश बढ़ाने की चर्चा भी तेज हो गई है।
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