Arariya : भारत नेपाल बॉर्डर पर नया साल मनाने आए लोग उस समय फंस गए जब नेपाल पुलिस और तस्करों के बीच मुठभेड हो गई। सीमा पर स्थित सुनसरी जिले का लौकही रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. नेपाल पुलिस और तस्करों के बीच हुई कथित मुठभेड़ में एक 45 वर्षीय कारोबारी, विजय साह की मौत के बाद सीमावर्ती इलाकों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और पथराव हुआ. इस हंगामे के कारण पिकनिक मनाने नेपाल गए सैकड़ों भारतीय सैलानी सीमा पार फंस गए और उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
नेपाल बॉर्डर पर कैसे शुरू हुआ विवाद ?
नेपाल बॉर्डर पर घटना 31 दिसंबर की रात करीब एक बजे की है. जानकारी के अनुसार, विजय साह भारत से ई-रिक्शा पर चीनी, खैनी और चॉकलेट जैसे सामान लेकर नेपाल जा रहा था. नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने उसे रोकने की कोशिश की. पुलिस का दावा है कि तस्करों की ओर से पहले फायरिंग की गई, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई, जिससे विजय साह की मौके पर ही मौत हो गई. हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई मुठभेड़ नहीं बल्कि सीधा हमला था. चर्चा यह भी है कि तस्करी के एवज में पैसों के लेनदेन को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस ने गोली मारी.
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नेपाल बॉर्डर पर पुलिस चौकी फूंकी, पेट्रोल बम से हमला
मौत की खबर फैलते ही गुरुवार सुबह से ही कोसी गांवपालिका के पास हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पूर्व-पश्चिम राजमार्ग को जाम कर दिया और मृतक के शव व ई-रिक्शा को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया. स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने नेपाल सशस्त्र पुलिस की चौकी (बीट) में आग लगा दी. भीड़ ने पुलिस पर पत्थर और पेट्रोल बम से हमले किए, जिसमें कई जवानों के घायल होने की खबर है. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे.



