Rajasthan: नया साल 2026 राजस्थान के लिए सिर्फ कैलेंडर का बदलाव नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीतियों, नीयत और योजनाओं की असली परीक्षा भी है। सरकार की 26 बड़ी योजनाएं इस साल ज़मीन पर उतरनी हैं, जिनसे प्रदेश के भविष्य की दिशा तय होगी। सवाल यही है कि क्या ये योजनाएं आम आदमी की ज़िंदगी में बदलाव ला पाएंगी या फिर फाइलों और दावों तक ही सीमित रह जाएंगी।
जल योजनाएं: प्यास बुझाने की बड़ी तैयारी
रामजल सेतु लिंक परियोजना के तहत चंबल और उसकी सहायक नदियों का पानी पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों तक पहुंचाने की योजना है। 2026 में मुख्य नहरों का काम निर्णायक चरण में पहुंचने वाला है, जिससे करोड़ों लोगों को पेयजल और किसानों को सिंचाई मिलने की उम्मीद है। यमुना जल समझौते के ज़रिए शेखावाटी क्षेत्र की करीब तीन दशक पुरानी पानी की समस्या को हल करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है। साल 2026 में डीपीआर और पाइपलाइन निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही फिरोजपुर फीडर रिलाइनिंग परियोजना से श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के किसानों को पूरा पानी मिलने और रिसाव व चोरी में कमी आने का दावा किया जा रहा है।
उद्योग और रोजगार: अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार?
बाड़मेर में बन रही पचपदरा रिफाइनरी को राजस्थान की अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है। 2026 में इसके उत्पादन शुरू होने से हज़ारों लोगों को रोजगार मिलने और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं, बाड़मेर ड्राई पोर्ट की योजना से राजस्थान को समुद्री व्यापार से जोड़ने और निर्यात–आयात को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
सड़क और कनेक्टिविटी: लॉजिस्टिक्स हब बनने का दावा
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे और मुकुंदरा की आठ लेन सुरंग से राजस्थान की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने की बात कही जा रही है। इससे राज्य को लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने का दावा है। कोटपूतली–किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से दिल्ली–जयपुर की दूरी और यात्रा समय कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे उद्योगों को भी नया कॉरिडोर मिलेगा।
शहरों में राहत: मेट्रो और स्मार्ट ट्रैफिक
जयपुर मेट्रो फेज–2 के विस्तार से ट्रैफिक दबाव और प्रदूषण कम होने का दावा किया जा रहा है। वहीं जोधपुर एलिवेटेड रोड और भरतपुर में एआई आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से जाम की समस्या से राहत देने की तैयारी है। चूरू और सादुलपुर में रिंग रोड परियोजनाओं का मकसद शहरों के भीतर यातायात को सुगम बनाना है।
हवाई कनेक्टिविटी: पहली उड़ान की तैयारी
कोटा को उसका पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट मिलने जा रहा है, जिससे शिक्षा नगरी को सीधी हवाई पहचान मिलने की दिशा में कदम बढ़े हैं। इसके साथ ही किशनगढ़ एयरपोर्ट के विस्तार से अजमेर–पुष्कर क्षेत्र के लिए वैकल्पिक एविएशन हब तैयार किया जा रहा है।
पर्यटन को मिलेगा बूस्टर
राजस्थान को फिल्म शूटिंग का बड़ा केंद्र बनाने के लिए फिल्म टूरिज्म नीति लाई जा रही है। हाड़ौती टूरिज्म सर्किट के तहत कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां को पर्यटन के नए नक्शे पर लाने की कोशिश है। जैसलमेर के सोनार दुर्ग हेरिटेज वॉक–वे, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी टाइगर प्रोजेक्ट तथा चंबल डॉल्फिन सेंचुरी से पर्यटन के साथ–साथ स्थानीय रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य है।
शिक्षा, खेल और रोजगार: युवाओं पर फोकस
रोजगार कैलेंडर 2026 के तहत सरकार एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य बता रही है। तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिए IIIT कोटा में एआई और डेटा साइंस सेंटर शुरू किया जा रहा है। वहीं बीकानेर में स्पोर्ट्स कॉलेज के ज़रिए खेल और शिक्षा को साथ आगे बढ़ाने की योजना है। सरकार की ये 26 योजनाएं काग़ज़ों पर तो बड़े बदलाव का वादा करती हैं, लेकिन असली परीक्षा ज़मीन पर होगी। क्या 2026 में ये योजनाएं आम आदमी की ज़िंदगी को आसान बनाएंगी? क्या पानी, रोजगार और कनेक्टिविटी के वादे पूरे होंगे? या फिर ये सब सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाला वक्त देगा।



