BAP vs BJP : डूंगरपुर में जिला विकास समन्वय और मॉनिटरिंग कमेटी की मीटिंग उस वक्त विवाद में बदल गई, जब BJP सांसद मन्नालाल रावत और भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत आमने-सामने आ गए। मीटिंग के दौरान राजकुमार रोत ने आदिवासी इलाकों से जुड़े मुद्दे उठाने शुरू किए, जिस पर मन्नालाल रावत ने कहा कि मीटिंग एजेंडा के हिसाब से चलेगी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस तेज हो गई और मामला तू-तू, मैं-मैं तक पहुंच गया। हालात इतने बिगड़ गए कि सिक्योरिटी को बीच-बचाव करना पड़ा।
धमकी के आरोप और दोनों पक्षों की अलग-अलग सफाई
विवाद के दौरान BAP विधायक उमेश डामोर ने भी “लड़ना है तो बाहर आ जा” कह दिया, जिससे माहौल और गरमा गया। मीटिंग के बाद राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि वह कमेटी के चेयरमैन हैं और आदिवासी मुद्दे उठाना उनका हक है, लेकिन भाजपा सांसद की तरफ से बार-बार उन्हें रोका गया। वहीं मन्नालाल रावत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि BAP नेताओं ने मीटिंग में लिमिट क्रॉस की, गलत भाषा का इस्तेमाल किया और दिशा की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया।
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आदिवासी वोट बैंक की लड़ाई, BAP बनी बड़ी चुनौती
असल में यह विवाद सिर्फ एक मीटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दक्षिण राजस्थान की आदिवासी राजनीति है। इन इलाकों में भाजपा लंबे समय से काम कर रही है, लेकिन पिछले कुछ सालों में भारतीय आदिवासी पार्टी तेजी से मजबूत हुई है। 2018 में BTP नाम से शुरू हुई पार्टी का वोट शेयर 0.72 फीसदी था, जो 2023 में बढ़कर 2.33 फीसदी हो गया। 2023 विधानसभा चुनाव में BAP ने 3 सीटें जीतीं और 2024 लोकसभा चुनाव में बांसवाड़ा से सांसद भी बनाया। यही बढ़ती ताकत अब भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है।



