लोकसभा ने Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Bill 2025 को मंजूरी दे दी है। इसे आम तौर पर न्यूक्लियर एनर्जी बिल 2025 कहा जा रहा है। इस बिल के पास होने के बाद भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि अब इस सेक्टर में निजी कंपनियों की एंट्री का रास्ता खुल गया है।
अब तक न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था, लेकिन नए कानून के जरिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को अनुमति मिल गई है। इसका सीधा असर न्यूक्लियर साइंस में करियर बनाने वाले छात्रों और रिसर्चर्स पर पड़ने वाला है।
SHANTI बिल क्यों है खास?
परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, यह बिल परमाणु ऊर्जा उद्योग में निजी कंपनियों की भागीदारी को कानूनी रूप से मंजूरी देता है। साथ ही, यह परमाणु क्षति से जुड़े मामलों में एक व्यावहारिक नागरिक दायित्व व्यवस्था तय करता है और न्यूक्लियर एनर्जी रेगुलेशन को मजबूत बनाता है।
सरकार का मानना है कि इससे देश में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और तकनीकी विकास की रफ्तार तेज होगी।
भारत में कहां होती है न्यूक्लियर साइंस की पढ़ाई?
भारत में न्यूक्लियर साइंस और न्यूक्लियर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं, जहां रिसर्च और प्रोफेशनल ट्रेनिंग दोनों कराई जाती है। इनमें प्रमुख हैं—
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भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), मुंबई
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साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स, कोलकाता
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई
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इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च, कलपक्कम
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होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट (HBNI)
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IIT बॉम्बे, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (NISER)
ये संस्थान न्यूक्लियर रिसर्च, एनर्जी सिस्टम और एडवांस साइंस की पढ़ाई के लिए जाने जाते हैं।
न्यूक्लियर साइंस में कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं?
न्यूक्लियर साइंस और इंजीनियरिंग में स्टूडेंट्स के लिए कई स्पेशलाइज्ड कोर्स उपलब्ध हैं, जैसे—
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MSc न्यूक्लियर साइंस
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MTech न्यूक्लियर इंजीनियरिंग
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एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग
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न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी
IIT बॉम्बे, IIT मद्रास, IIT कानपुर और IIT खड़गपुर जैसे संस्थानों में ये कोर्स कराए जाते हैं, जो इंडस्ट्री और रिसर्च दोनों के लिहाज से अहम माने जाते हैं।
SHANTI बिल से स्टूडेंट्स को क्या होगा फायदा?
न्यूक्लियर एनर्जी बिल 2025 के लागू होने से छात्रों को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं—
🔹 ज्यादा जॉब ऑप्शन
अब तक नौकरियां ज्यादातर सरकारी संस्थानों तक सीमित थीं, लेकिन निजी कंपनियों के आने से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
🔹 रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश बढ़ेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजी और कोर्स शुरू हो सकते हैं।
🔹 नए कोर्स और स्किल ट्रेनिंग
आने वाले समय में स्किल-बेस्ड और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड न्यूक्लियर कोर्स शुरू होने की संभावना है, जिससे छात्रों को बेहतर करियर विकल्प मिलेंगे।
🔹 करियर का दायरा होगा बड़ा
अब न्यूक्लियर साइंस सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्राइवेट एनर्जी कंपनियों, रिसर्च फर्म्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी मौके मिलेंगे।
निष्कर्ष
SHANTI बिल 2025 भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इससे न सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि न्यूक्लियर साइंस में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के लिए करियर के नए रास्ते भी खुलेंगे।



