Hackers : साइबर सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल वर्ल्ड में खतरे अब सालों में नहीं, बल्कि हफ्तों और महीनों में बदल रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, सीईआरटी-इन और साइबर सुरक्षा कंपनी एसआईएसए की ताज़ा डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट में एक बड़ी चेतावनी दी है कि अब सिर्फ पासवर्ड या ओटीपी के भरोसे डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित मानना बहुत बड़ी भूल होगी, क्योंकि हैकर्स ने अब ‘सेशन हाईजैकिंग’ नाम का नया और बेहद खतरनाक रास्ता ढूंढ लिया है।
आखिर क्या होता है सेशन हाईजैक?
जानकारी के अनुसार जब आप अपने फोन या कंप्यूटर पर नेट बैंकिंग या कोई बैंकिंग ऐप लॉगिन करते हैं, तो लॉगिन करने से लेकर लॉगआउट करने के बीच के समय को सेशन कहा जाता है। जैसे ही आपने बैंक अकाउंट का पासवर्ड और ओटीपी डाला, आपका एक सुरक्षित सेशन शुरू हो जाता है। जब तक आप ऐप में काम कर रहे हैं, बैंक का सिस्टम आपको पहचानता है। हैकर्स इसमें सेंधमारी के लिए सेशन हाईजैक का इस्तेमाल करते हैं जिसका मतलब है कि हैकर्स आपके पासवर्ड या ओटीपी को छुए बिना, सीधे आपके इस पहले से चालू सेशन के बीच में घुस जाते हैं।
कैसे हो रही है यह नई सेंधमारी?
चूंकि हैकर्स आपके पहले से चालू और वेरिफाइड सेशन का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए बैंक के सिस्टम को लगता है कि यह लेन-देन आप खुद ही कर रहे हैं। जब तक यूज़र को नुकसान का एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस नए खतरे में सबसे बड़ी भूमिका एआई की है। जिस साइबर हमले की प्लानिंग करने में पहले हैकर्स की पूरी टीम को कई हफ्ते लग जाते थे, अब एआई की मदद से वही काम कुछ ही मिनटों में और बिना इंसानी मदद के ऑटोमैटिक तरीके से हो जाता है।
सुरक्षा एजेंसियों ने जारी किया 18 महीने का रोडमैप
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए देश की सुरक्षा एजेंसियों ने वित्तीय संस्थानों और बैंकों के लिए अगले 18 महीनों का एक चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया है, जिसे एक्शन प्लान के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती 6 महीनों में बैंकों को ऐसा प्रमाणीकरण अपनाना होगा जिसे हैकर्स आसानी से चकमा न दे सकें। फिशिंग-प्रतिरोधी और मशीनी अकाउंट्स की सुरक्षा को दोगुना करना होगा। 6 से 12 महीने के दौरान कड़ी निगरानी होगी और डिजिटल सिस्टम की 24Û7 निगरानी की जाएगी। अगर कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखती है, तो सिस्टम बिना समय गंवाए उसे खुद ही ब्लॉक कर देगा। 12 से 18 महीने भविष्य की तकनीक का इस्तेमाल होगा। आने वाले समय के खतरों से निपटने के लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसी एडवांस तकनीकों और एआई आधारित सुरक्षा ढांचे को लागू किया जाएगा।
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