UDISE 2025-26: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि राजस्थान की भाजपा सरकार के मात्र दो वर्षों में ही 8.4 लाख से अधिक स्कूल ड्रॉपआउट होना बेहद चिंताजनक है. इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब निजी स्कूलों में नामांकन सरकारी स्कूलों से आगे निकल गया है. यह प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की गिरती साख का सीधा प्रमाण है. विडंबना देखिए, इस अवधि में शिक्षकों की संख्या 7.8 लाख से बढ़कर 7.9 लाख से अधिक हुई, फिर भी कुप्रबंधन के कारण सरकारी स्कूलों ने 9.3 लाख से अधिक छात्र खो दिए. आज राजस्थान में सिर्फ स्कूलों की छतें ही नहीं गिर रहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा तंत्र पर जनता का जो बरसों पुराना विश्वास था, वो भी गिर रहा है.
राजस्थान की भाजपा सरकार के मात्र दो वर्षों में ही 8.4 लाख से अधिक स्कूल ड्रॉपआउट होना बेहद चिंताजनक है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब निजी स्कूलों में नामांकन सरकारी स्कूलों से आगे निकल गया है। यह प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की गिरती साख का सीधा प्रमाण है।
विडंबना देखिए, इस…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 9, 2026
गहलोत ने आगे लिखा कि शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना, स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर दरकना, रिपेयरिंग ठप होना और शिक्षा में सुधार के बजाय पाठ्यक्रम का लगातार राजनीतिकरण करना ही इस पतन का कारण है. जब शिक्षा मंत्री का ध्यान शिक्षा छोड़कर बाकी सब जगह रहेगा, तो यही स्थिति होनी थी. हमारी कांग्रेस सरकार ने अंग्रेजी मीडियम स्कूलों सहित जिस बेहतरीन सरकारी शिक्षा मॉडल को खड़ा किया था, उसे इस सरकार की अदूरदर्शिता ने पूरी तरह तबाह कर दिया है. मुख्यमंत्री जी, राजस्थान के नौनिहालों के इस छिनते भविष्य का जिम्मेदार कौन है?
छात्रों की संख्या में 8.4 लाख की कमी
बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल के पहले दो शैक्षणिक सत्रों के दौरान स्कूलों में नामांकन में 8.4 लाख से अधिक छात्रों की कमी आई है. मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई UDISE+ 2025-26 की ताजा रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा को लेकर यह चौंकाने वाली बात सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार के द्वारा स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने, शिक्षकों की भर्ती करने और नई शिक्षा नीति लागू करने के बावजूद नामांकन में गिरावट दर्ज की गई है.
2 सालों से छात्रों की संख्या में कमी
राजस्थान में साल 2023-24 में स्कूलों में कुल नामांकन 1.70 करोड़ था, जो साल 2024-25 में घटकर करीब 1.66 करोड़ रह गया है. इसके बाद साल 2025-26 में यह घटकर 1.61 करोड़ पर पहुंच गया है. इस तरह दो सालों में छात्रों की संख्या में 8.4 लाख से ज्यादा की कमी आई है. यानि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में औसतन 4 लाख से ज्यादा छात्र कम हुए हैं.
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