Mechanized Transfer Station : राजधानी जयपुर को स्वच्छता में नंबर वन लाने की दिशा में नगर निगम लगातार प्रयासरत है इसी कडी में सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नगर निगम ने तैयारी शुरू की है। शहर के झालाना में करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से तैयार 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन का शुभारंभ किया गया है। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विधायक कालीचरण सराफ की मौजूदगी में इसका लोकार्पण किया।
मशीन आधारित होगी परिवहन प्रक्रिया
इस ट्रांसफर स्टेशन के शुरू होने के साथ ही मालवीय नगर और झालाना क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर लांगड़ियावास स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट तक कचरे के परिवहन की प्रक्रिया मशीन आधारित हो जाएगी। इससे कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होगा, बल्कि कर्मचारियों पर निर्भरता भी काफी हद तक कम होगी।
इस मॉडल पर काम करेगा यह स्टेशन
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार यह ट्रांसफर स्टेशन बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पर डवलप किया गया है। इससे शहर में ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। वहीं भविष्य में जयपुर के सभी जोन में इसी तरह के मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन डवलप किए जाएंगे। इससे पूरे शहर में वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण किया जा सकेगा।
स्टेशन की क्षमता बढ़ेगी क्षमता
झालाना क्षेत्र में पहले से 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाला ट्रांसफर स्टेशन संचालित है। अब 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले नए स्टेशन के शुरू होने से यहां कुल कचरा हैंडलिंग क्षमता बढ़कर 250 टन प्रतिदिन हो गई है। नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने बताया कि मालवीय नगर, झालाना और आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने में यह स्टेशन अहम भूमिका निभाएगा।
कम ट्रिप में पहुंचेगा ज्यादा कचरा
नगर निगम की गैराज शाखा के अधीक्षण अभियंता ने मीडिया को बताया कि इस ट्रांसफर स्टेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूरी तरह मैकेनाइज्ड कार्यप्रणाली है। शहर से घर-घर कचरा संग्रहण करने वाले हूपर वाहन ट्रांसफर स्टेशन तक कचरा लेकर पहुंचेंगे। यहां कचरा सीधे हॉपर में डाला जाएगा, जहां से वह स्टेटिक कॉम्पेक्टर यूनिट तक पहुंचेगा। कॉम्पेक्टर मशीन कचरे को दबाकर उसका आयतन कम कर देगी। इससे एक बार में अधिक मात्रा में कचरा बड़े कंटेनरों में भरकर लांगड़ियावास स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट तक भेजा जा सकेगा।
दुर्गंध नहीं फैलेगी
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि परिवहन के दौरान कचरा खुले में नहीं फैलेगा। दुर्गंध की समस्या कम होगी और ट्रांसपोर्टेशन के लिए वाहनों के चक्कर भी घटेंगे। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। नए ट्रांसफर स्टेशन में तीन रिफ्यूज कॉम्पेक्शन यूनिट स्थापित की गई हैं, जबकि कचरे के परिवहन के लिए पांच हुक लोडर वाहन और सात बड़े कंटेनरों की व्यवस्था की गई है। आने वाले सभी वाहनों का वजन दर्ज करने के लिए वेब्रिज लगाया गया है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी संचालन प्रभावित न हो। इसके लिए डीजी सेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मैन्युअल नहीं मशीन-टू-मशीन होगा काम
जानकारी के अनुसार पूरे सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कचरे का कॉम्पेक्शन, कंटेनर में लोडिंग और परिवहन बिना किसी मैन्युअल हस्तक्षेप के मशीन-टू-मशीन प्रणाली के माध्यम से हो सके। इससे कार्य की गति बढ़ेगी और सफाई कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियां भी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित होंगी।
लोकार्पण कार्यक्रम में स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा- झालाना में शुरू हुआ यह मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन जयपुर की सफाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि अगर यह परियोजना अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित होती है तो शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था भी अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक हो जाएगी।
मंत्री ने कहा- सरकार का लक्ष्य अब कचरा प्रबंधन में मैनुअल हैंडलिंग को पूरी तरह समाप्त करना है। इसी दिशा में नगर निगम के प्रत्येक जोन में ऐसे मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि पूरे शहर में एक समान आधुनिक व्यवस्था लागू की जा सके।
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