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‘नो-एंट्री’ स्टिकर से कर रहे थे करोड़ों की कमाई! दिल्ली पुलिस ने बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया

दिल्ली में ट्रकों को ट्रैफिक चेकिंग से बचाने के लिए चल रहा फर्जी ‘स्पेशल स्टिकर’ रैकेट आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया। क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन को आगे बढ़ाते हुए इस गिरोह के तीसरे मॉड्यूल को भी पकड़ लिया। इस कार्रवाई में मास्टरमाइंड रिंकू राणा और उसका सहयोगी सोनू शर्मा गिरफ्तार किए गए हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 31 लाख रुपये नकद, 500 से अधिक फर्जी स्टिकर और करोड़ों की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए।

व्हाट्सऐप ग्रुप से चलता था पूरा अवैध सिस्टम

जांच में पता चला कि सोनू शर्मा एक विशेष व्हाट्सऐप ग्रुप चलाता था, जिसमें—

  • फर्जी स्टिकर की बिक्री

  • पुलिस चेकिंग पॉइंट्स की लाइव जानकारी

  • ट्रकों की मूवमेंट

  • नो-एंट्री टाइम में मार्ग बताना

जैसी सारी गतिविधियां संचालित होती थीं। ड्राइवर हर महीने 2,000 से 5,000 रुपये देकर ये स्टिकर खरीदते थे और उन्हें ‘फ्री मूवमेंट’ का आश्वासन दिया जाता था।

10 साल से सक्रिय था रैकेट

जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क पिछले 10 वर्षों से काम कर रहा था। कमाई को छुपाने के लिए कई बैंक खाते रिश्तेदारों और परिचितों के नाम से खुलवाए गए थे। स्टिकर को हर महीने अलग डिज़ाइन और रंग में तैयार किया जाता, ताकि पकड़ में न आए।

एक अन्य आरोपी मुकेश उर्फ पकौड़ी को भी गिरफ्तार किया गया है, जो ड्राइवरों और कुछ पुलिसकर्मियों के बीच सेटिंग कराने का काम करता था। उसके घर से भी कई दस्तावेज मिले हैं।

हाई-टेक तरीके से चलता था नेटवर्क

गिरोह के ऑपरेटर व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए रीयल-टाइम निर्देश देते थे—

  • किस रास्ते से ट्रक निकालना है

  • किस चेकपॉइंट पर पुलिस मौजूद है

  • कौन सा मार्ग सुरक्षित है

यह ग्रुप एक तरह से “कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम” की तरह काम करता था। कमाई को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि कोई लिंक न बन पाए।

MCOCA के तहत मामला दर्ज

क्राइम ब्रांच ने इस पूरा ऑपरेट हो रहे सिंडिकेट पर MCOCA के तहत केस दर्ज किया है। जांच में कुछ मौजूदा और रिटायर्ड पुलिसकर्मी भी शक के घेरे में हैं।
कॉल डिटेल्स, IP लॉग और चैट बैकअप की गहन जांच जारी है।

पुलिस अधिकारी ने क्या कहा?

अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी सिर्फ स्टिकर ही नहीं बेचते थे, बल्कि पुलिसकर्मियों के फर्जी वीडियो बनाकर उन्हें डराते और अवैध वसूली करते थे। इसके अलावा नए सदस्यों की भर्ती भी इसी नेटवर्क के जरिए होती थी।

क्राइम ब्रांच अब गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में है और नेटवर्क की पूरी वित्तीय जांच की जा रही है।

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