Ajmer Dargah News: कनाडा और यूके से आए दल ने ईरान और अमेरिका के युद्ध पर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि युद्व किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में कनाडा और यूके से आए एक दल ने जियारत की और विश्व में शांति की दुआ मांगी। दल में 31 लोग शामिल थे। दल ने दरगाह में मखमली चादर चढ़ाई, फूल पेश किए । दल को दरगाह के खादिम हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने विदेशी जायरीनों का स्वागत किया और सूफी परंपरा के अनुसार दुआएं कराईं।
युद्व पर जताई चिंता
इस मौके पर दरगाह जियारत के बाद विदेशी दल ने पत्रकारों से बातचीत में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने ख्वाजा साहब की दरगाह में विश्व शांति, सद्भाव और संघर्षरत क्षेत्रों में अमन की बहाली के लिए खास दुआएं मांगीं।
ख्वाजा का दरबार अमन का केन्द्र
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने इस अवसर पर कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का दरबार सदियों से अमन, भाईचारे और मानवता का केंद्र रहा है। “विदेशी जायरीनों का यह दल सूफियत की सार्वभौमिकता का जीता-जागता प्रमाण है। हमारी दुआ है कि दुनिया भर में युद्ध समाप्त हों और शांति कायम हो।“ उन्होंने बताया कि दरगाह में प्रतिदिन हजारों जायरीन आते हैं, जिनमें विदेशी जायरीनो की संख्या बढ़ रही है।
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दरगाह गंगा-जमुना तहजीब का प्रतीक
अजमेर शरीफ की दरगाह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी आस्था से जियारत करते हैं। ख्वाजा साहब को ’सुल्तान-उल-हिंद’ कहा जाता है और उनकी शिक्षाएं प्रेम, सेवा और सहिष्णुता पर आधारित हैं।
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