Ajmer: दक्षिण एशिया में मुसलमानों के आस्था का सबसे बडा केन्द्र और भारत में सूफीवाद के उद्गम स्थल अजमेर स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को भी विवादस्पद बनाने की एक बार फिर से कोशिश हुई है। अजमेर न्यायालय में दरगाह परिसर में मंदिर होने के हिन्दू सभा के दावे पर न्यायालय में मामला पहले से ही विचाराधीन है कि सोमवार को अजमेर न्यायालय ने एक और याचिका को स्वीकार कर लिया है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ.एपी सिंह के जरिए कोर्ट में याचिका लगाई गई। याचिकाकर्ता के वकील डॉ एपी सिंह के अनुसार न्यायालय ने राजवर्धन सिंह परमार द्वारा 2022 में राष्ट्रपति को लगाई गई याचिका का जिक्र करते हुए परमार को प्रथम याचिका माना है। न्यायालय ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 फरवरी रखी है।
न्यायालय ने राजवर्धन सिंह को प्रथम पक्षकार माना
अधिवक्ता ने बताया कि राजवर्धन सिंह की ओर से 2022 में राष्ट्रपति को याचिका लगाई थी। जो की सबसे पहले लगाई गई याचिका है। दरगाह के अंदर महादेव का शिवलिंग है। प्राचीन काल में वहां पर पूजा होती थी। राजस्थान सरकार, आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट, दरगाह कमेटी को पार्टी बनाया है। सभी को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
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वर्षों से बंद मंदिर जल्द खुलेगा
महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने बताया कि न्यायालय ने हमारे द्वारा 2022 में राष्ट्रपति को लगाई गई याचिका का जिक्र करते हुए हमें मुख्य पक्षकार माना है। इसे लेकर हम कोर्ट का आभार प्रकट करते हैं। राजस्थान में महाराणा प्रताप सेना की ओर से यात्रा की गई थी। जिसमें लाखों लोगों के हस्ताक्षर से याचिका लगाने का अवसर मिला था। हमें पूर्ण विश्वास है कि अजमेर दरगाह के नीचे 40 वर्षों से भगवान शिव का मंदिर बंद है, वह बहुत जल्द खुलेगा। वहां पूजा होगी और पुष्कर से जल भी लाकर चढ़ाया जाएगा। परमार ने कहा कि हमने याचिका में वहां के नक्शे, रेकी और शिवलिंग के चित्र सहित अन्य सबूत पेश किए हैं। इसके अलावा भी अगर न्यायालय कोई सबूत मांगेगा तो उन्हें पूरा करने का काम महाराणा प्रताप करेगी।
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