Kanwad Yatra : सावन माह में कांवड यात्रा का अपना अलग ही महत्व है। धार्मिक आस्था के साथ छोटे, बडे कांवडिए अपने कंधों पर गंगाजल लिए हरिद्वार से विभिन्न शिव मंदिर की ओर चल देते हैं और एक लंबा सफर तय करते हैं। कांवड उठाए लोगों की यात्राएं अपने आप में अनूठी होती हैं।
बीमार पति को कंधे पर लेकर निकली
यूपी के मेरठ में आस्था का नजारा देखने को मिला। रीना नाम की महिला अपने बीमार पति को पीठ पर बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ पहुंची है। साथ में उसके दोनों बच्चे भी पैदल चल रहे हैं। रीना का मानना है कि महादेव के दर पर मांगी गई उनके पति की अच्छी सेहत की मन्नत जरूर पूरी होगी।
उम्र 20 साल कद तीन फिट
बुलंदशहर के अनूपशहर में 20 साल के मुकुल 41 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। मुकुल की लंबाई 3 फीट है। उनका वजन 35 किलो है। उन्होंने अनूपशहर गंगा घाट से जल भरा। कांवड़ कंधे पर रखकर पैदल गांव की ओर रवाना हुए। रास्ते में लोग उनके हौसले और भक्ति की तारीफ कर रहे हैं। उनका स्वागत कर रहे हैं।
भाजपा विधायक ने की कांवड़ियों की सेवा
सहारनपुर में भाजपा के नगर विधायक राजीव गुंबर कांवड़ियों की सेवा करते नजर आए। उन्होंने थके हुए कांवड़ियों के पैर दबाए और मशीन से उनकी मसाज भी की। इसके बाद विधायक कांवड़ियों के साथ डीजे पर डांस करते दिखे।
मेरठ में 23 फीट लंबी कांवड़ देखने उमड़े लोग
हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे निवाड़ी (गाजियाबाद) के शिवभक्तों की 23 फीट लंबी कांवड़ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस विशाल कांवड़ को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा कांवड़ मार्ग श्बोल बमश् और श्हर-हर महादेवश् के जयकारों से गूंज उठा।
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