Akshardham: दिल्ली के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में इन दिनों एक विशाल और दिव्य आकर्षण सबका ध्यान खींच रहा है – 108 फुट ऊंची सुनहरी चमक वाली तपोमूर्ति श्री नीलकंठ वर्णी! यह प्रतिमा भगवान स्वामीनारायण के किशोरावस्था के तपस्वी रूप को दर्शाती है, जो एक पैर पर खड़े होकर गहन ध्यान मुद्रा में लीन हैं।यह भव्य प्रतिमा अभी निर्माणाधीन है और इसका आधिकारिक अनावरण तथा अभिषेक मार्च 2026 के अंत तक होने की उम्मीद है। फ्लाईओवर से गुजरते समय भी (Akshardham) में यह सोने-सी चमकती विशालकाय मूर्ति दूर से नजर आती है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया केंद्र बन चुकी है।
नीलकंठ वर्णी प्रतिमा की खासियतें
- ऊंचाई: 108 फुट (आकाश छूती ऊंचाई)
- मुद्रा: एक पैर पर खड़े, दोनों भुजाएं आकाश की ओर उठाए, गहन तपस्या की प्रतीक
- रूप: भगवान स्वामीनारायण का बाल्यकाल/किशोर तपस्वी रूप (नीलकंठ वर्णी), जब वे मात्र 11 वर्ष की आयु में घर त्यागकर 7 वर्षों तक भारत, नेपाल, तिब्बत आदि में पैदल यात्रा करते रहे
- प्रेरणा: नेपाल के मुक्तिनाथ में उनकी कठोर साधना का यह क्षण, जहां वे महीनों तक एक पैर पर खड़े रहे
नीलकंठ वर्णी का जीवन परिचय
भगवान स्वामीनारायण का जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपैया (गोंडा) में हुआ। मात्र 11 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और नीलकंठ वर्णी नाम से सादा जीवन अपनाया। कमर में केवल एक लंगोट बांधकर, न्यूनतम भोजन पर वे हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए पवित्र तीर्थों के दर्शन करते रहे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों, लोगों से मिलकर जीवन, करुणा और आध्यात्मिकता के गहन रहस्य समझे।यह यात्रा सनातन धर्म के उत्थान और समाज सुधार का आधार बनी।
अक्षरधाम में इस प्रतिमा का महत्व
दिल्ली का अक्षरधाम (Akshardham) पहले से ही अपनी अद्भुत वास्तुकला, प्रदर्शनियों और संगीतमय फव्वारे के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह नई 108 फुट की तपोमूर्ति परिसर को और भी आकर्षक बनाएगी, जो त्याग, तपस्या और भक्ति का प्रतीक बनेगी।ऐसी ही भव्य प्रतिमाएं गांधीनगर, न्यू जर्सी (अमेरिका) और अन्य स्वामीनारायण मंदिरों में भी स्थापित हैं, लेकिन दिल्ली वाली सबसे ऊंची और चमकदार होने के कारण विशेष चर्चा में है।अगर आप दिल्ली आएं तो अक्षरधाम जरूर जाएं – यह न केवल दर्शन का स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रतीक है।



