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नवजात शिशु में ठंड लगने के संकेत न करें नजरअंदाज, समय पर इलाज है बेहद जरूरी

नवजात शिशु में ठंड के संकेत न करें नजरअंदाज

देश के कई हिस्सों में सर्दी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। गिरते तापमान का सबसे ज्यादा असर नवजात शिशुओं की सेहत पर पड़ता है। नवजात बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है, ऐसे में ठंड उनके लिए गंभीर खतरा बन सकती है। चूंकि शिशु अपनी परेशानी शब्दों में नहीं बता पाते, इसलिए माता-पिता को उनके व्यवहार और शारीरिक बदलावों पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।

अगर समय रहते ठंड के शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो किसी भी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि नवजात शिशु में ठंड लगने के कौन-कौन से संकेत दिखाई देते हैं और सर्दियों में उनकी देखभाल कैसे करनी चाहिए।

नवजात शिशु में ठंड लगने के प्रमुख लक्षण

ठंड लगने पर नवजात शिशु के शरीर में कई बदलाव नजर आ सकते हैं। सबसे पहले बच्चे के हाथ-पैर असामान्य रूप से ठंडे महसूस होने लगते हैं। कई बार त्वचा का रंग हल्का पीला या नीला पड़ सकता है, जो चिंता का संकेत होता है। इसके अलावा शिशु का शरीर सामान्य से ठंडा लगना भी एक अहम लक्षण है।

ठंड की वजह से बच्चा ज्यादा सुस्त हो सकता है और दूध पीने में रुचि कम दिखा सकता है। कुछ शिशुओं में रोने की आवाज कमजोर हो जाती है या वे सामान्य से कम प्रतिक्रिया देने लगते हैं। तेज या अनियमित सांस चलना भी गंभीर संकेत माना जाता है, जिसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कुछ मामलों में नवजात को बार-बार छींक आना, नाक बंद रहना या हल्की खांसी भी हो सकती है। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

सर्दियों में नवजात की देखभाल कैसे करें?

ठंड के मौसम में नवजात शिशु की देखभाल में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है। बच्चे को हल्के लेकिन गर्म कपड़े पहनाएं ताकि शरीर का तापमान संतुलित बना रहे। बहुत ज्यादा कपड़े पहनाने से भी परेशानी हो सकती है, इसलिए कपड़ों की संख्या मौसम के अनुसार रखें।

शिशु को ठंडी हवा से बचाएं और कमरे का तापमान संतुलित रखें। पंखा या ठंडी हवा सीधे बच्चे पर न लगने दें। मां का दूध नवजात के लिए सबसे सुरक्षित और फायदेमंद होता है, इसलिए नियमित रूप से स्तनपान कराना बेहद जरूरी है।

नहलाने के बाद बच्चे को तुरंत सुखाकर गर्म कपड़े पहनाएं ताकि शरीर ठंडा न पड़े। रात के समय हल्के और गर्म कंबल का इस्तेमाल करें। सुबह की हल्की धूप में बच्चे को कुछ देर बैठाना लाभकारी हो सकता है, लेकिन तेज ठंड या हवा से बचाव जरूरी है।

इन बातों का रखें खास ध्यान

  • शिशु को ठंडी हवा और सीधे पंखे से दूर रखें

  • हाथ-पैर और शरीर का तापमान समय-समय पर चेक करें

  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर नवजात को ले जाने से बचें

  • किसी भी घरेलू नुस्खे या खुद से दवा देने से बचें

  • लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह जरूर लें

निष्कर्ष

सर्दी का मौसम नवजात शिशुओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही देखभाल और सतर्कता से उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है। छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, इसलिए समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। माता-पिता की जागरूकता ही नवजात की सेहत की सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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