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मदरसा बोर्ड खत्म, अब नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण करेगा काम

madarsa board closed

Changes in Education: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत हुई है. राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को खत्म करने का निर्णय लिया है. मदरसा बोर्ड की जगह अब उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण काम करेगा. पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक अहम फैसला लिया है. राज्यपाल की मंजूरी के बाद सरकार ने इस नए प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है.

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में अध्यक्ष सहित कुल 11 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं. रुड़की स्थित बीएसएम पीजी कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को इस प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है. सरकार का कहना है कि यह प्राधिकरण अब राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की दिशा और दशा तय करेगा.

क्यों खत्म किया गया मदरसा बोर्ड

मदरसा बोर्ड को खत्म करने के उद्देश्य के बारे में उत्तराखंड सरकार के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि सरकार का मानना है कि एक समान और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए यह कदम जरूरी था. पिछले विधानसभा सत्र में मदरसा बोर्ड को खत्म करने से जुड़ा विधेयक पास किया गया था. इसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर नए प्राधिकरण का गठन किया गया है.

क्या होगा नए प्राधिकरण का काम

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का मुख्य काम मदरसा संस्थानों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का संचालन और निगरानी करना होगा. यह प्राधिकरण तय करेगा कि इन संस्थानों में शिक्षा का स्वरूप कैसा होगा और सिलेबस का ढांचा क्या रहेगा. सरकार का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना इस प्राधिकरण का प्रमुख उद्देश्य होगा.

मान्यता का नया नियम

नए प्राधिकरण के तहत आने वाले सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अब उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से मान्यता लेनी होगी. यानी अब मदरसा या अन्य अल्पसंख्यक संस्थान अलग व्यवस्था के तहत नहीं, बल्कि राज्य की मुख्य शिक्षा प्रणाली से जुड़े होंगे. इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और करियर में आसानी होगी.

कब से लागू होगा नया सिस्टम

डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण पूरी तरह से अस्तित्व में आ जाएगा. इसी तारीख से मदरसा बोर्ड की जगह यह नया प्राधिकरण काम करना शुरू करेगा. सरकार का कहना है कि इस अवधि में सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी.

बोर्ड में कौन-कौन होंगे सदस्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बनाए गए इस प्राधिकरण बोर्ड में कई जाने-माने शिक्षाविदों और अधिकारियों को शामिल किया गया है. अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अलावा प्रो. राकेश जैन, डॉ. सैयद अली, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ. एल्बा मेड्रिले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह, राजेंद्र बिष्ट और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को सदस्य बनाया गया है.

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इसके साथ ही महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण भी इस प्राधिकरण के सदस्य होंगे. यह बोर्ड मिलकर शिक्षा से जुड़े सभी अहम फैसले लेगा.

सिलेबस पर होगा फोकस

नया प्राधिकरण सिर्फ संस्थानों की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा. यह अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों के सिलेबस को भी तय करेगा. सरकार का कहना है कि सिलेबस ऐसा होगा, जिससे छात्र आधुनिक शिक्षा से जुड़ सकें और आगे की पढ़ाई या नौकरी में पीछे न रहें.

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