IND vs NZ: पहले वनडे में चोटिल वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी के लिए भेजे जाने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने इस फैसले को लेकर टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। कैफ ने कहा कि खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर अपनाए जाने वाले मानदंड सभी के लिए समान होने चाहिए।
पहले वनडे के बाद उठे सवाल
भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले वनडे के बाद टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल खड़े हो गए हैं। वडोदरा में खेले गए इस मुकाबले में भारत को 301 रनों का लक्ष्य मिला था। मैच (IND vs NZ) के अहम मोड़ पर चोटिल वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। सुंदर ने 7 गेंदों में नाबाद 7 रन बनाए और केएल राहुल के साथ मिलकर टीम को जीत दिलाई। हालांकि, मैच के तुरंत बाद उन्हें पूरी सीरीज से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह आयुष बदोनी को टीम में शामिल किया गया।
मोहम्मद कैफ ने क्यों उठाए सवाल?
मोहम्मद कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि टीम मैनेजमेंट ने वॉशिंगटन सुंदर के मामले में वही सोच नहीं अपनाई, जो पहले अन्य खिलाड़ियों के लिए अपनाई गई थी। कैफ ने उदाहरण देते हुए कहा कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान जब शुभमन गिल चोटिल हुए थे, तब उन्हें पूरी तरह आराम दिया गया था। कोलकाता टेस्ट में, टीम को 20-30 रनों की जरूरत होने के बावजूद गिल को बल्लेबाजी के लिए नहीं भेजा गया, ताकि उनकी चोट और गंभीर न हो।
जीत के बावजूद फैसला जोखिम भरा
कैफ ने माना कि भारत ने मैच जीत लिया, लेकिन सिर्फ जीत के आधार पर इस फैसले को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि चोटिल खिलाड़ी को दबाव की स्थिति में बल्लेबाजी के लिए भेजना जोखिम भरा होता है। मैच के दौरान यह साफ दिख रहा था कि सुंदर पूरी तरह फिट नहीं थे, क्योंकि वह डबल रन नहीं ले पा रहे थे और केवल सिंगल रन पर निर्भर थे।
टीम के पास थे दूसरे विकल्प
कैफ के मुताबिक, उस समय टीम के पास अन्य विकल्प मौजूद थे। अगर रन रेट प्रति गेंद के आसपास था, तो कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज या प्रसिद्ध कृष्णा जैसे किसी खिलाड़ी को बल्लेबाजी के लिए भेजा जा सकता था। चोटिल खिलाड़ी को तभी मैदान पर उतारना चाहिए, जब कोई और विकल्प न बचा हो।
चोट बढ़ने का खतरा
मोहम्मद कैफ ने साफ शब्दों में कहा कि वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी के लिए भेजना एक गलत और जोखिम भरा फैसला था। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में एक हफ्ते या दस दिन की चोट 20-25 दिन तक भी खिंच सकती है, जो खिलाड़ी और टीम—दोनों के लिए नुकसानदायक है।



