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Iran News: ईरान में अब कितने परमाणु वैज्ञानिक बचे हैं? इजराइली डोजियर से बड़ा खुलासा

साल 2025 ईरान के लिए कई मोर्चों पर भारी दबाव वाला साबित हुआ है। एक ओर उसके क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों की ताकत कमजोर हुई, तो दूसरी ओर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा झटका लगा। ताजा खुलासे के मुताबिक, ईरान के कई शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को इस साल निशाना बनाया गया, जिससे उसकी न्यूक्लियर रणनीति पर गंभीर असर पड़ा है।

इजराइल के एक आंतरिक डोजियर के अनुसार, वर्ष 2025 में ईरान के 100 परमाणु वैज्ञानिकों की एक सूची तैयार की गई थी। इस लिस्ट में शामिल वैज्ञानिकों में से 14 को अलग-अलग हमलों में मार दिया गया, जबकि एक वैज्ञानिक को जासूसी के आरोप में ईरान ने खुद सजा दी। मौजूदा समय में ईरान के पास करीब 85 परमाणु वैज्ञानिक अब भी जीवित बताए जा रहे हैं।


2025 में क्यों बढ़ा ईरान पर दबाव?

साल 2025 ईरान के लिए रणनीतिक रूप से काफी नुकसानदेह रहा। इस दौरान उसके तीन प्रमुख सहयोगी संगठन गंभीर रूप से कमजोर हुए। इसके साथ ही ईरान के परमाणु ढांचे पर सीधा असर डालने वाली कार्रवाइयों ने उसकी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी।

खुफिया जानकारी के मुताबिक, मारे गए सभी 14 वैज्ञानिकों को एक गुप्त ऑपरेशन के तहत निशाना बनाया गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों का जीवित रहना अमेरिका और इजराइल दोनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।


कैसे तैयार किया गया परमाणु वैज्ञानिकों का डोजियर?

खुफिया एजेंसियों ने कई वर्षों की मेहनत के बाद ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों से जुड़ा विस्तृत डाटा इकट्ठा किया।
बताया जाता है कि:

  • ईरान के भीतर लंबे समय से अंडरकवर एजेंट सक्रिय थे

  • स्थानीय नेटवर्क और जमीनी सूत्रों के जरिए वैज्ञानिकों की पहचान की गई

  • कई एजेंट आम नागरिकों की तरह काम करते हुए जानकारी जुटाते रहे

  • विदेशी नागरिकों और पर्यटकों के जरिए भी सूचनाएं इकट्ठा की गईं

इन्हीं जानकारियों के आधार पर एक विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई गई।


घर और रास्ते में बनाए गए निशाने

डोजियर तैयार होने के बाद वैज्ञानिकों को निशाना बनाने की रणनीति बनाई गई। ज्यादातर हमले वैज्ञानिकों के घरों या रोजमर्रा की आवाजाही के दौरान किए गए।
हर लक्ष्य के लिए अलग टीम और अलग तरीका अपनाया गया। इन हमलों में स्नाइपर, हथियार, ड्रोन और विस्फोटकों तक का इस्तेमाल किया गया।

ऑपरेशन शुरू होने के बाद ईरान को भनक लग गई और उसने कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों को भूमिगत कर दिया। कई वैज्ञानिकों को सुरक्षित सैन्य ठिकानों के पास स्थानांतरित किया गया।


अंदरूनी लीक से मिला बड़ा सुराग

खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक परमाणु वैज्ञानिक पर विदेशी एजेंसियों को जानकारी देने का आरोप लगा था, जिसे बाद में ईरान ने सख्त सजा दी। माना जाता है कि उसी के जरिए ईरान के परमाणु ढांचे से जुड़ी अहम जानकारियां बाहर पहुंचीं, जिससे पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।


ईरान का परमाणु कार्यक्रम लगभग ठप

लगातार हमलों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ईरान का परमाणु कार्यक्रम फिलहाल ठप पड़ता नजर आ रहा है।
हमलों से पहले ईरान यूरेनियम संवर्धन के काफी ऊंचे स्तर तक पहुंच चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संवर्धन और बढ़ता, तो परमाणु हथियार बनाना संभव हो सकता था।

हालांकि जून 2025 के बाद हुए हमलों से कई परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। ईरान सरकार का कहना है कि पहले प्रभावित इलाकों की सफाई और जांच की जाएगी, उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।


निष्कर्ष

ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों पर हुए हमलों ने उसकी न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका दिया है। भले ही कई वैज्ञानिक अब भी जीवित हैं, लेकिन मौजूदा हालात में ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर चुनौतियों से घिरा हुआ है।

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