Property : देश के टॉप हाउसिंग हॉटस्पॉट मार्केट में मकान खरीदने वालों की चांदी हो गई क्योंकि उन्हें डबल फायदा हो रहा है। रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट अब निवेशकों के लिए दोहरे रिटर्न (Dual Return) का आकर्षक विकल्प बनकर उभर रहा है। ANAROCK रिसर्च की रिर्पोट के अनुसार, 2019 से 2026 की दूसरी तिमाही तक देश के शीर्ष 11 रेजिडेंशियल मार्केट्स में जहां प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, वहीं रेंटल यील्ड (किराये से होने वाली आय) में भी सुधार देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब प्रॉपर्टी की कीमतों का असर रेंटल यील्ड पर नकारात्मक नहीं पड़ रहा है।
नोएडा और गुरुग्राम में सबसे ज्यादा मूल्य वृद्धि
ANAROCK के मुताबिक एनसीआर के नोएडा और गुरुग्राम ने 2019 से जून 2026 के बीच सबसे अधिक कैपिटल वैल्यू में वृद्धि दर्ज की है। नोएडा में औसत प्रॉपर्टी कीमतें 2019 में 4,795 रुपये से बढ़कर 2026 की दूसरी तिमाही में 10,780 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं। इसमें 125% की वृद्धि देखी गई। वहीं, रेंटल यील्ड 3.2% से बढ़कर 3.9% हो गई, यानी 70 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई। गुरुग्राम में प्रॉपर्टी कीमतें 6,150 रुपये बढ़कर 13,350 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 117% की वृद्धि है। इस दौरान रेंटल यील्ड 3.5% से बढ़कर 4.3% हो गई यानी 80 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हुआ। ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, “आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी और रेंटल यील्ड के बीच विपरीत संबंध देखा जाता है। कीमतें बढ़ने से रेंटल यील्ड पर दबाव आता है, क्योंकि किराये अक्सर उतनी तेजी से नहीं बढ़ते। लेकिन देश के प्रमुख रेजिडेंशियल मार्केट्स में अब यह ट्रेंड बदल रहा है। कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों के साथ रेंटल यील्ड भी बढ़ी है।”
बेंगलूरु-हैदराबाद में रेंटल यील्ड सबसे ज्यादा बढ़ी
दक्षिण भारत के बेंगलूरु और हैदराबाद मार्केट्स में रोजगार, आईटी सेक्टर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के विस्तार ने रेजिडेंशियल डिमांड को मजबूती दी है। बेंगलूरु में प्रॉपर्टी कीमतें 2019 के 4,975 रुपये से बढ़कर 2026 की दूसरी तिमाही में 9,450 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं। इसमें 90% की वृद्धि हुई। वहीं, रेंटल यील्ड 3.6% से बढ़कर 4.6% हो गई यानी इसमें 100 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हुआ। हैदराबाद में प्रॉपर्टी कीमतें 4,195 रुपये से बढ़कर 8,090 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 93% की वृद्धि है।रेंटल यील्ड 2.6% से बढ़कर 3.6% हो गई, यानी 100 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी देखी गई।
मुंबई-दिल्ली में भी सुधरी रेंटल यील्ड
ANAROCK के मुताबिक मुंबई में 2019 से Q2 2026 के बीच प्रॉपर्टी की कीमतों में 64% की वृद्धि हुई। कीमतें 17,845 रुपये से बढ़कर 29,270 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं। वहीं रेंटल यील्ड 3.5% से बढ़कर 4.3% हो गई। दिल्ली में प्रॉपर्टी कीमतों में 47% की बढ़ोतरी हुई और ये 18,200 रुपये से बढ़कर 26,700 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं। इस दौरान रेंटल यील्ड 2.2% से बढ़कर 3.2% हो गई। नवी मुंबई में प्रॉपर्टी कीमतों में 71% और ठाणे में 63% की वृद्धि हुई। दोनों मार्केट्स में रेंटल यील्ड में 80 बेसिस प्वाइंट का सुधार हुआ। पुणे में रेंटल यील्ड 65 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई, जबकि प्रॉपर्टी कीमतें में 51% इजाफा हुआ। चेन्नई और कोलकाता में अन्य प्रमुख बाजारों की तुलना में वृद्धि सीमित रही। चेन्नई में प्रॉपर्टी कीमतें 47% बढ़ीं और रेंटल यील्ड में 55 बेसिस प्वाइंट का सुधार हुआ। वहीं कोलकाता में कीमतें 45% और रेंटल यील्ड 60 बेसिस प्वाइंट बढ़ी।
इंफ्रास्ट्रक्चर व रोजगार से बढ़ी मांग
अनुज पुरी ने कहा, “भारतीय रेजिडेंशियल मार्केट अब निवेशकों को दोहरे रिटर्न का ऐसा अवसर दे रहा है, जहां पूंजीगत लाभ (कैपिटल एप्रिसिएशन) और बेहतर रेंटल यील्ड दोनों हासिल हो रहे हैं। खासकर ऐसे समय में, जब देश के प्रमुख शहरों में घरों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार केंद्रों के विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की बढ़ती मौजूदगी और महानगरों की ओर लगातार हो रहे पलायन का परिणाम है। बेहतर कनेक्टिविटी ने नए रोजगार केंद्र विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे अधिक रेजिडेंशियल मार्केट्स को फायदा मिला है।” उन्होंने कहा, “सरल शब्दों में कहें तो आर्थिक विकास से रोजगार पैदा होता है, रोजगार से लोगों का पलायन बढ़ता है, पलायन से किराये के मकानों की मांग मजबूत होती है और लगातार बनी रहने वाली रेजिडेंशियल डिमांड से प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी होती है।”
यह भी पढ़ें –तेल कारोबार के लिए नए रास्ते तलाश रहे अरब, UAE और कुवैत, होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने की कवायद
यह भी देखें-सरकार के खिलाफ युवाओं का फूटा गुस्सा ! शहीद स्मारक पर वेटिंग नियम को लेकर बड़ा आंदोलन



