CEC Gyanesh Kumar:मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 130 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित उस प्रस्ताव नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त पद से हटाने की मांग की गई थी. भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने का यह पहला मामला था. पूरे मामले पर विपक्ष और बीजेपी के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रिया आई है. कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि यह बहुत असंवैधानिक काम है. संविधान का गला घोटा गया है. संविधान खतरे में है. चुनाव आयोग भाजपा की ईकाई की तरह काम कर रहा है.
“ये हमारे एतिहासिक कालखंड का एक क्षण हैं”
RJD नेता मनोज कुमार झा ने कहा कि खारिज प्रस्ताव का नहीं हुआ है खारिज संसद के प्रक्रिया का हुआ है. ये प्रावधान क्यों थे ये असाधारण स्थिति के लिए था. क्या इससे ज्यादा असाधारण स्थिति हो सकती है जहां CEC और भाजपा नेतृत्व में फर्क करना मुश्किल हो जाए उनकी कार्यशैली कभी निष्पक्ष और स्वंतत्र न दिखे. ये हमारे एतिहासिक कालखंड का एक क्षण हैं जब संसदीय परंपराएं जमीन दोष की जा रही है.
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“इन्हें ये काम रास नहीं आता है”
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि इसे खारिज होना ही था. जिस तरह संवैधानिक संस्थाओं को कांग्रेस हो या विपक्ष के लोग हो जिस तरह का व्यवहार हो रहा है अभी हाल में इन्होंने(विपक्ष) लोकसभा अध्यक्ष के लिए भी अविश्वास प्रस्ताव लाया था तब इन्हें मुंह की खानी पड़ी. SIR चल रहा है चुनाव आयोग अच्छे काम कर रहे हैं अन्य संस्थाएं अच्छा काम कर रही हैं लेकिन इन्हें ये काम रास नहीं आता है.
“चुनाव आयोग को कैसे कोई हटा देगा”
बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करने वाले विपक्षी सांसदों के नोटिस खारिज करने पर कहा कि चुनाव आयोग को कैसे कोई हटा देगा वो एक संवैधानिक पद इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया. ये स्वागत योग्य कदम है. किसी के कहने से चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त या सुप्रीम कोर्ट का जज हट जाएगा क्या. क्योंकि उनका (विपक्षी) स्वार्थ पूरा नहीं हो रहा है वे चाहते हैं कि उनके पक्ष में निर्णय हो जाए तो ऐसा नहीं हो सकता है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने अपील को खारिज किया है. हम इसका स्वागत करते हैं.



