Narendra Modi: हैदराबाद के सिकंदराबाद में आज रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान कल मैं बंगाल में था. वहां पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री ने शपथ ली है. पहली बार बंगाल में प्रचंड बहुमत से भाजपा सरकार बनी है और मैं देख रहा हूं कि भाजपा की जो ऐतिहासिक विजय है. उसका उत्साह यहां तेलंगाना में भी दिख रहा है. यहां भाजपा का हर कार्यकर्ता जोश से भरा हुआ है. आज देश के कोने-कोने में भाजपा पर जनता का आशीर्वाद निरंतर बढ़ रहा है. देश के लोग बार-बार भाजपा के विकास मॉडल पर, सुशासन के मॉडल पर अपनी मुहर लगा रहे हैं. आजादी के 75 साल बाद असम में भाजपा सरकार की हैट्रिक लगी है और पुडुचेरी में भी भाजपा-NDA सरकार दोबारा वापस आई है. भाजपा की ऐसी जीत के बाद मैं तेलंगाना के लोगों की भावनाएं भी देख रहा हूं. तेलंगाना में हर कोई एक ही बात कह रहा है. अबकी बार, तेलंगाना में भी मोदी सरकार.
“जनता को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखा था”
PM मोदी ने कहा कि किसी न किसी राज्य में चुनाव होता है, कोई हारता है, कोई जीतता है. यह लोकतंत्र में स्वाभाविक है, यह लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा है. लेकिन बंगाल में भाजपा की जीत का जितना उत्सव देश में है, जितनी चर्चा दुनिया भर में हो रही है वैसी चर्चा पहले किसी जीत पर नहीं हुई. इसका कारण यह है कि बंगाल में सिर्फ राजनीतिक दलों की हार नहीं हुई, वहां एक ऐसी राजनीति को लोगों ने पराजित किया है जिसने एक तरह से बंगाल की जनता को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखा था. एक समय था जब दक्षिण से लेकर पूर्वोत्तर तक भाजपा को हाशिये की पार्टी माना जाता था लेकिन आज भारत का जनमानस बता रहा है कि विचार अगर राष्ट्र के लिए हो तो उसकी हुंकार को कोई सीमा रोक नहीं पाती.
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प्रधानमंत्री ने कहा कि इस देश में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार, परिवारवाद को बढ़ाया और संवैधानिक संस्थाओं का गला घोंटने का काम किया. जब TMC बनी तब उसने कांग्रेस से ये सारी बुराइयां सीख ली. साथ ही लेफ्ट की भी जितनी बुरी आदतें थी, वह भी TMC ने अपना ली और फिर TMC ने भारत की राजनीति का सबसे तिरस्कृत और खतरनाक मॉडल डेवेलप किया. TMC ने अपने इस तानाशाही मॉडल में बंगाल को बेड़ियों से जकड़ दिया था. बंगाल की जनता ने राजनीति के ऐसे भयावह, तानाशाही मॉडल को पराजित किया है और इसलिए पूरे देश में उत्सव है.
“जनता वंशवाद, परिवारवाद, विश्वासवाद चुन रही है”
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के हर कोने में असम से ओडिशा और बंगाल से पुडुचेरी तक, ये सिर्फ चुनावी विस्तार नहीं है. ये भारत के राजनीतिक मानस में आए उस परिवर्तन का संकेत है जहां जनता अब वंशवाद नहीं, परिवारवाद नहीं, विश्वासवाद चुन रही है. आप सोचिए, 10 साल पहले असम में भाजपा के कुछ ही विधायक थे. आज वहां तीसरी बार भाजपा-NDA की सरकार बनी है. 10 वर्ष पहले बंगाल में भाजपा के सिर्फ तीन विधायक थे. आज बंगाल में भाजपा 200 पार पहुंच चुकी है. जहां कभी भाजपा का झंडा उठाने को कोई तैयार नहीं होता था, वहां आज भाजपा की सरकारें बन रही हैं.
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