Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन पर तीन दिन के विशेष सत्र के दौरान संसद में आज गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तब सबने सर्वसम्मति से इसे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा. इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह चर्चा शुरू हुई..राष्ट्र के जीवन में कुछ ज़रूरी पल आते हैं. ऐसे समय में, समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता उस पल को पकड़ लेती है और उसे देश की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है. भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में, ये वैसे ही पल हैं.
“इसमें राजनीति की बू आ रही है”
PM मोदी (Narendra Modi) ने आगे कहा कि जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वे खुद के पिछले 30 सालों के परिणामों को देख लें. मैं समझता हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि आज से 25-30 साल पहले जिसने भी इसका विरोध किया, वह विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया लेकिन आज ऐसा समझने की गलती न करें. पिछले 25-30 सालों में जमीनी स्तर, पंचायती चुनाव व्यवस्था में जीतकर आई बहनों में एक राजनीतिक चेतना है, वे ज़मीनी स्तर पर ओपिनियन मेकर हैं. आज वे वोकल हैं. वे कहती हैं कि अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभाएं और संसद में होती हैं.
“आप देश की महिलाओं पर भरोसा करें”
उन्होंने (Narendra Modi) कहा कि मुलायम सिंह थे तब से एक विषय चला आ रहा है, उनके परिवार वाले भी वह विषय चला रहे हैं. आप देश की महिलाओं पर भरोसा करें, एक बार 33% बहनों को यहां आने दें, आकर उन्हें निर्णय करने दें कि किस वर्ग को देना है, किस वर्ग को नहीं, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों जताते हैं? उन्हें आने तो दीजिए. मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं लेकिन मेरा दायित्व समाज के सभी लोगों को साथ लेकर चलने का है. मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है. यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसे अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को यह दायित्व दिया.
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“राजनीति के तराजू से मत तोलिए”
प्रधानमंत्री (Narendra Modi) कहा कि मैं अपील करता हूं कि इसे राजनीति के तराजू से मत तोलिए, यह राष्ट्रहित का निर्णय है. पिछले दिनों जब 2023 में हम इसपर चर्चा कर रहे थे तब हर कोई कह रहा था कि इसे जल्दी लागू करें, 2024 में संभव नहीं था, अब 2029 के लिए हमारे पास अवसर है। अगर हम तब भी नहीं करते हैं तो स्थिति क्या बनेगी इसकी हम कल्पना कर सकते हैं। समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब न करें. अगर गारंटी शब्द चाहिए तो मैं गारंटी शब्द का उपयोग करता हूं, अगर वादे की बात करते हैं तो मैं वादा देता हूं. जब नीयत साफ है तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है. मैं आज जिम्मेदारी के साथ सदन में कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े, मैं जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी. यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी. भूतकाल में जो सरकारें रही और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात चला आ रहा है, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी.
“पाप में से मुक्ति पाने का अवसर है”
PM मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि हम किसी भ्रम में न रहें, हम किसी अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं. यह उसका हक है. हमने कई दशकों से उसे रोका है, आज उसका प्रायश्चित करके हमारे लिए उस पाप में से मुक्ति पाने का अवसर है. हम सब जानते हैं कि हर एक ने कैसे चालाकी की है कि ‘हम इसके पक्ष में हैं, हम इसके साथ हैं लेकिन…’, यह कहकर हर बार कोई न कोई तकनीकी पक्ष ले आए और इसे रोका गया. हर बार ऐसी चीज़ें लाई गई है. आपको कहना नहीं है कि आप इसका विरोध कर रहे हैं इसलिए तकनीकी बहानेबाज़ी कर रहे हैं. भांति-भांति की बहानेबाज़ी करके इसे 3 दशक तक रोका गया. अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि इसका मुझे राजनीतिक लाभ होगा लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा। इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए. जैसे ही यह पारित हो जाए मैं विज्ञापन देकर सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं. क्रेडिट आप ले लीजिए. हमारे संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार इतना सीमित नहीं है. लोकतंत्र की जननी के रूप में यह निर्णय भारत की प्रतिबद्धता है, भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता है. इसी प्रतिबद्धता के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी.



