Nripendra Mishra Statement:अयोध्या मंदिर समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कारसेवकों पर चली गोली पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय लगभग 90 प्रतिशत राजनीतिक होते हैं, जबकि 10 प्रतिशत प्रशासनिक. वहीं जब उनसे कारसेवकों पर गोलीकांड के समय मुलायम सिंह यादव की सरकार में प्रमुख सचिव रहने के प्रश्न पर कहा कि वह कल्याण सिंह के कार्यकाल में भी प्रमुख सचिव थे. कल्याण सिंह सरकार के वक्त जब उन्हें यह बताया गया कि अयोध्या में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया कि कुछ भी हो जाए अयोध्या में गोली नहीं चलेगी. मिश्रा ने आगे कहा कि श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित वैकल्पिक गर्भगृह की स्मृतियां अक्षुण्ण रहेंगी. नृपेंद्र मिश्रा के बयान पर राजनेताओं और धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया आई है.
“मुलायम सिंह ने गोली चलवाने के आदेश नहीं दिए थे”
समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने नृपेंद्र मिश्रा के कारसेवकों पर चली गोली पर दिए बयान कहा कि ऐसे निर्णय 90 प्रतिशत राजनीतिक होते हैं. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह ने गोली चलवाने के आदेश नहीं दिए थे, आदेश डीजीपी ने दिए थे. मुलायम सिंह ने कानून की हिफाजत की थी, जो इस बात से साबित हो गया कि सुप्रीम कोर्ट ने जब यह फैसला सुनाया कि 6 दिसंबर 1992 को एक अपराध हुआ था, जब वह अपराध मानता है, तो मुलायम सिंह ने अपने ज़माने में वह अपराध नहीं होने दिया. उन्होंने कहा कि यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी भी थी. क्या बुरा था? गोली चलाने के आदेश नेता जी ने हरगिज नहीं दिए, गोली चलाने के आदेश उस वक्त के डीजीपी वगैरह ने दिए थे. वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आगे कहा कि जब गोली चलाने का निर्णय हुआ, उस समय आदेश देने वाले वही तो थे, कोई दूसरा थोड़ी था.
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अयोध्या के धर्मगुरुओं ने क्या कहा?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के कारसेवकों पर गोली चलाने वाले 90% फैसले राजनीतिक होने संबंधी बयान पर अयोध्या के संत-महंतों ने सहमति जताई.हनुमानगढ़ी के प्रमुख संत और महंत राजू दास ने कहा कि उन्होंने सही कहा है क्योंकि उच्च पद पर बैठे बड़े अधिकारियों पर स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री की चलती है. मुख्यमंत्री प्रदेश के मुखिया होते हैं. मुख्यमंत्री जो कहेंगे, वह करना पड़ेगा.
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि सर्वप्रथम नृपेंद्र मिश्रा का वक्तव्य सराहनीय है. सत्ता की कुर्सी पर बैठे हुए नेताओं के क्रियाकलाप से प्रशासन फैसला लेता है. प्रशासन का व्यक्तिगत फैसला नहीं होता है. रामभक्तों पर गोली चलाने के फैसले पर नृपेंद्र मिश्रा का कोई अधिकार नहीं था. न ही उनके फैसले से गोली चली. गोली मुलायम सिंह के कहने पर चली. उन्होंने कई बार मंचों से साझा किया कि हमने गोली चलवाने का काम किया.
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने कहा कि वह कल्याण सिंह और मुलायम सिंह के समय भी मुख्य सचिव थे. यह आरोप इन पर लगता रहा है कि जब कारसेवकों पर गोली चली तब यह मुख्य सचिव थे. कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव के कारण प्रशासन को निर्णय लेना पड़ता है. सत्ता का वह भी हिस्सा हैं. अगर उन्होंने यह बात कही है तो निश्चित रूप से यह दबाव उनके ऊपर रहे होंगे.



