UGC New Rule 2026: देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है. मामले को लेकर सियासत भी तेज होती जा रही है. इसी बीच UGC के नए नियमों को लेकर लोक गायिका नेहा सिंह राठौड़ की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि UGC के मूल संकल्पना में समानता को बढ़ावा देना है और मैं समझती हूं कि यदि किसी कानून या नियम का उद्देश्य किसी वर्ग या समाज के लोगों को अपमान से बचाना है, पक्षपात से बचाना है और अगर कोई कानून सामाजिक न्याय की बात कर रहा है तो इसमें दिक्कत क्या है? और मुझे तो लगता है कि ये UGC का कानून न सिर्फ अच्छा है, बल्कि बहुत जरुरी भी था.
“आखिर कोई कब तक प्रताड़ना झेल सकता है”
नेहा सिंह राठौड़ (Neha Singh Rathore) ने आगे कहा कि आखिर कोई कब तक प्रताड़ना झेल सकता है, कोई कब तक अन्याय झेल सकता है. दूसरी चीज एक बात इसमें मैं और जोड़ना चाहूगी कि लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं, तो मैं समझती हूं कि जब आरक्षण आया था, तब भी बहुत विरोध हुआ था, अभी भी विरोध होता है. SC-ST एक्ट का भी विरोध होता है. मैं समझती हूं कि जब बात देशहित की हो, तो फायदे और कायदे में से एक चीज़ को चुनना चाहिए. कायदे की बात यह है कि UGC जो है, वो देशहित में हैं और हमें इसका सम्मान करना चाहिए.
यह भी पढ़ें: “दीदी ने ED को हरा दिया…” ममता बनर्जी से मुलाकात के दौरान बोले अखिलेश यादव
“मेरे मन में चोर नहीं है’
लोक गायिका (Neha Singh Rathore) ने कहा कि जैसे मैं हूं,संयोग की बात है कि मैं भी सवर्ण हूं, लेकिन मेरे मन में चोर नहीं है. आप समझ रहे हैं, चोरी से किसको भय लगेगा? चोरी के खिलाफ अगर कोई कानून बनेगा, तो किसको भय लगेगा? जो चोर होगा. अत्याचार के खिलाफ अगर कोई कानून बनता है, तो किसे भय लगेगा? जो अत्याचारी होगा। कई लोग तो मैंने एक वीडियो पोस्ट किया तो उसमें मुझे गंदी-गंदी खूब गालियां दे रहे थे और ये कह रहे थे कि तुम पक्का SC होगी, तुम पक्का ST होगी, तुम पक्का OBC होगी.
“जाति बिरादरी के फायदे का व्याकरण”
उन्होंने (Neha Singh Rathore) आगे कहा कि मैंने कहा कायदे की बात करने के लिए ज़रूरी नहीं है कि कोई आप वर्ग विशेष में पैदा हुए हो, ये मात्र संयोग की बात है कि मैं सवर्ण हूं. मैं समझती हूँ कि जो जाति बिरादरी के फायदे का व्याकरण है , वो देशहित के व्याकरण से बहुत भिन्न होता है और जो राष्ट्रवाद की बात करते हैं उन्हें तो बिल्कुल जाति बिरादरी से ऊपर उठना चाहिए और उन्हें उदारता से पेश आना चाहिए. ये एक अच्छा कानून है इसका स्वागत किया जाना चाहिए.



