Cabinet Reshuffle: केंद्र की मोदी सरकार में बड़ा फेरबदल होने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मोदी कैबिनेट से 6 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है. इसके अलावा 9 नए चेहरों को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. ये फेरबदल अगले कुछ हफ्ते में होने की संभावना है. बीते हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस तरह से बारी-बारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले, उससे कैबिनेट फेरबदल को अवश्यंभावी माना जा रहा है.
इन नेताओं की मोदी कैबिनेट से हो सकती है छुट्टी!
धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री,क्यों हटाए जा सकते हैं?
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय कई बड़े विवादों में घिरा. वर्ष 2026 में NEET पेपर लीक, CBSE बोर्ड की कॉपियों की जांच में गड़बड़ी और UGC की इक्विटी गाइडलाइन्स को लेकर विवाद सामने आए. इससे पहले 2024 में UGC-NET पेपर लीक और 2020 में नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन में देरी को लेकर भी सरकार विपक्ष के निशाने पर रही. लगातार उठते सवालों के चलते कैबिनेट फेरबदल में उनका नाम चर्चा में है.
हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, क्यों हटाए जा सकते हैं?
हाल के महीनों में कांग्रेस ने तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014 से 2017 के बीच पुरी और जेफरी एपस्टीन के बीच ईमेल और मुलाकातें हुई थीं. हालांकि इन दावों को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है. इसके अलावा 74 वर्ष की उम्र और लंबे समय से मंत्री रहने के कारण भी कैबिनेट में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं.
रवनीत सिंह बिट्टू, रेल राज्य मंत्री, क्यों हटाए जा सकते हैं?
रवनीत सिंह बिट्टू ने सार्वजनिक रूप से पंजाब की सक्रिय राजनीति में लौटने और विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. 21 जून 2026 को उनका राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो गया. माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें पंजाब विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका दे सकती है,जिसके चलते उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए मुक्त किया जा सकता है.
पंकज चौधरी, वित्त राज्य मंत्री, क्यों हटाए जा सकते हैं?
बीजेपी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति के तहत पंकज चौधरी का नाम कैबिनेट फेरबदल में चर्चा में है. पार्टी चाहती है कि वह पूरी तरह संगठन और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करें.
हर्ष मल्होत्रा, सहकारिता राज्य मंत्री, क्यों हटाए जा सकते हैं?
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति उनके सामने भी लागू हो सकती है। माना जा रहा है कि संगठन को मजबूत करने के लिए उन्हें मंत्री पद से मुक्त किया जा सकता है।
जॉर्ज कुरियन,अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री, क्यों इस्तीफा दिया?
23 जून 2026 को जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. माना जा रहा है कि केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन और कंजिराप्पल्ली सीट से उनकी हार इसके प्रमुख कारणों में रही. चुनावी रणनीति और राजनीतिक समीकरणों के चलते उनका इस्तीफा कैबिनेट फेरबदल से पहले एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है.
इन 9 नेताओं की मोदी कैबिनेट में हो सकती है एंट्री, क्यों बनी संभावना?
शक्तिकांत दास: मोदी सरकार के दो बड़े आर्थिक फैसलों-नोटबंदी और जीएसटी लागू करने में शक्तिकांत दास की महत्वपूर्ण भूमिका रही. RBI गवर्नर रहते हुए उन्हें लगातार तीन बार कार्यकाल विस्तार मिलना भी सरकार के उन पर भरोसे को दर्शाता है. उनके कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर रही, डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा मिला और बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया. प्रशासनिक अनुभव और आर्थिक मामलों की गहरी समझ के चलते उन्हें कैबिनेट में अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है.
अनुराग ठाकुर: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अनुराग ठाकुर सूचना एवं प्रसारण मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत सफल माना गया. अगले वर्ष हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी युवा मतदाताओं को साधने के लिए उन्हें फिर से बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है.
वीडी शर्मा: बीजेपी मध्य प्रदेश से नई राष्ट्रीय नेतृत्व की टीम तैयार करना चाहती है. वीडी शर्मा की पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता की रही है. उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी. ऐसे में उन्हें केंद्र सरकार में शामिल किया जा सकता है.
तरुण चुग: हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पंजाब के बजाय मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा. माना जा रहा है कि पार्टी संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और पंजाब की राजनीति में बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.
राघव चड्ढा: राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. माना जा रहा है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के संगठन और चुनावी रणनीति की गहरी समझ रखने वाले राघव को बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ा चेहरा बना सकती है. इसी रणनीति के तहत उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी स्थान मिल सकता है.
श्रीकांत शिंदे: महाराष्ट्र की राजनीति में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान श्रीकांत शिंदे ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. शिवसेना में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद उनकी सक्रियता बढ़ी है. गठबंधन में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
संजय दीना पाटिल: हालिया राजनीतिक बदलावों के दौरान उनके शिंदे गुट के साथ आने के बाद उनकी भूमिका और मजबूत हुई है. माना जा रहा है कि महायुति गठबंधन को मजबूती देने और महाराष्ट्र में राजनीतिक संतुलन साधने के लिए उन्हें मंत्री पद दिया जा सकता है.
काकोली घोष दस्तीदार: टीएमसी में राजनीतिक उठापटक के बाद बड़ी संख्या में सांसदों के साथ उनके नए राजनीतिक समीकरण बने. माना जा रहा है कि यदि वे बीजेपी के साथ सक्रिय भूमिका निभाती हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति को ध्यान में रखते हुए उन्हें केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है.
अरुण गोविल: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी हिंदुत्व, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समीकरणों को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वैश्य समाज और धार्मिक छवि के कारण अरुण गोविल को मंत्री बनाकर पार्टी चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर सकती है.
यह भी पढ़ें: केतन को किले से कैसे धक्का दिया ? पुलिस ने सिया-चेतन के सामने किया सीन रीक्रिएट



