Lenskart Dress Code Controversy:महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS कंपनी की एचआर पॉलिसी को लेकर खड़ा हुआ विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि लेंसकार्ट से जुड़ी ड्रेसकोड पॉलिसी का एक डॉक्यूमेंट सोशल मीडिया पर वायरल होने से नई बहस शुरू हो गई है. दरअसल, लेंसकार्ट की कथित पॉलिसी का जो डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है उसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है, वहीं हिजाब और पगड़ी को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है.
एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य शेयर किया स्क्रीनशॉट
एक एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने एक्स पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है. जिसमें कंपनी के फाउंडर से सवाल करते हुए लिखा गया है कि पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं? शेफाली वैद्य की पोस्ट के बाद लेंसकार्ट को लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया है.
“कंपनी का बायकॉट करने की अपील”
फिल्ममेकर अशोक पंडित भी लेंसकार्ट के कर्मचारियों के लिए जारी ड्रेसकोड पॉलिसी को लेकर भड़क उठे. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कंपनी का बायकॉट करने की अपील की है. इ्ंस्टाग्राम पोस्ट में अशोक पंडित ने लिखा कि पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से कहते हैं कि हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी तिलक कलावा नहीं. जबकि यह एक ऐसी कंपनी है जो हिंदू बहुल भारत में मौजूद है, जहां ज्यादातर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं! इस पर आप क्या कहेंगे? यह Lenskart की कर्मचारी स्टाइल गाइड का पेज 11 है। आप इसका लिंक यहां देख सकते हैं: scribd.com/document/90118…
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पीयूष बंसल ने दी सफाई
विवाद खड़ा होने पर लेंसकार्ट कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने एक्स पर पोस्ट कर स्पष्टीकरण दिया है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि मैं देख रहा हूं कि Lenskart से जुड़ा एक गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट तेजी से वायरल हो रहा है. मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि यह दस्तावेज़ हमारी वर्तमान नीतियों को बिल्कुल भी नहीं दर्शाता. हमारी पॉलिसी में किसी भी प्रकार के धार्मिक अभिव्यक्ति, जैसे बिंदी या तिलक, पर कोई प्रतिबंध नहीं है. हम अपनी गाइडलाइंस की समय-समय पर समीक्षा करते रहते हैं. समय के साथ हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी में बदलाव आया है और पुराने दस्तावेज़ आज की हमारी पहचान को नहीं दिखाते. इस स्थिति से जो भी भ्रम और चिंता पैदा हुई है, उसके लिए हम खेद व्यक्त करते हैं. एक कंपनी के रूप में हम लगातार सीखते और आगे बढ़ते रहते हैं. हमारी भाषा या नीतियों में अगर कोई कमी रही है, तो उसे हम सुधारते रहे हैं और आगे भी सुधारते रहेंगे. हमारे पास पूरे भारत में हजारों टीम मेंबर्स हैं, जो अपने धर्म और संस्कृति को गर्व के साथ हमारे स्टोर्स में प्रदर्शित करते हैं. वही लेंसकार्ट की असली पहचान हैं. Lenskart भारत में बना है, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए। हमारे लोगों की हर परंपरा और हर प्रतीक हमारी कंपनी का हिस्सा है और मैं कभी भी इसे प्रभावित नहीं होने दूंगा.



