Kangana Ranaut News; भाजपा सांसद कंगना रनौत ने आज बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो शेयर किया. उन्होंने कहा कि नमस्ते दोस्तों, यह रील मैं मीडिया के बंधुओं के लिए बना रही हूं क्योंकि मैंने कुछ प्रदर्शनकारियों को, जो गटर छाप, अनैतिक और अश्लील व्यवहार सड़क पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने प्रदर्शित कर रहे थे, उसे सामान्य और स्वीकार्य बनाने से मना किया है. मैंने कहा कि हम इस तरह के व्यवहार को इस समाज में स्वीकार नहीं करते. हम लोग नहीं चाहते कि हमारे घर के बच्चों को कोई अपनी अश्लील हरकतों से समय से पहले यौनिक सोच की ओर धकेल दे. हमारे घर के बुजुर्गों के सामने हमें शर्मिंदगी महसूस होती है. हम इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं करते और इसे सामान्य नहीं होने देंगे. तो मीडिया मेरे खिलाफ मिलकर अभियान चला रही है और यह नहीं बताएगी कि मैंने स्काईरूट जैसे स्टार्टअप की कितनी सराहना की है.
“संविधान के हिसाब से चलना है”
कंगना रनौत ने आगे कहा कि हमारे देश की जेन-ज़ी हमें कितनी ऊंचाइयों पर लेकर जा रही है. मैंने स्वयं नीट के छात्रों को कितनी बधाई दी और ऐसे बच्चों की भी प्रशंसा की जो अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठा रहे हैं. हमारी टीम में भी ऐसे बच्चे हैं. हमारे परिवार और रिश्तेदारी में भी जेन-ज़ी के भाई-बहन हैं जो हमारे बड़े-बड़े काम संपन्न करते हैं. लेकिन कुछ चंद फॉलोअर्स, कुछ टिप्पणियों और कुछ लाइक्स के लिए मीडिया वाले इतने ज्यादा बिक चुके हैं. मैं देख रही हूं कि कुछ नारीवादी, या कह लीजिए कुछ एंकर, पूरे-पूरे समाचार बुलेटिन कर रहे हैं और मुझे सिखा रहे हैं कि कंगना, इन महिलाओं पर गरिमा और अनुशासन का बोझ क्यों होना चाहिए? हम मिलेनियल पीढ़ी की महिलाओं पर गरिमापूर्ण और अनुशासित रहने का इतना दबाव था, तो यह बोझ इस पीढ़ी पर क्यों डाला जाए? क्षमा कीजिए, क्या आप अपनी बेटी को ऐसा सिखाएंगे? अनुशासन में रहना या मर्यादाओं में रहना कोई विकल्प नहीं है. भोंडा प्रदर्शन तो हर कोई करना चाहेगा, लेकिन अगर आपको समाज में रहना है और संविधान के हिसाब से चलना है, तो इसका मतलब है कि आपकी आजादी वहां खत्म हो जाती है जहां से मेरे नाक और कान शुरू होते हैं. आप भोंडे बनकर सिर्फ अपने कमरे में रह सकते हैं.
“अंधकारमय जीवन के अलावा कुछ नहीं बचेगा”
उन्होंने कहा कि बाहर आकर आप मेरे आराध्य, मेरे माता-पिता या मेरे घर के बच्चों के प्रति चाहे कोई भावना न रखें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उन्हें सड़क पर यौनिक गालियां दें या उनके सम्मान को ठेस पहुंचाएं. मेरे आराध्य मेरे भगवान हों या मेरे नेता. प्रधानमंत्री को लोग “परीक्षा का साथी” कहते हैं. बच्चे उनसे जुड़ी भावनाएं रखते हैं. कोई उन्हें नेता मानता है, कोई दोस्त, कोई परिवार का सदस्य और कोई भगवान मानता है. उसी तरह आप किसी की भावनाओं को आहत नहीं कर सकते. यह कोई आधुनिक या कूल बनने की बात नहीं है. यह एक बुनियादी नागरिक शिष्टाचार है. अगर आपको यह नहीं आता तो आपको सीखना पड़ेगा. आप इस अतिवादी नारीवाद से प्रभावित मत होइए. अपनी जिंदगी बर्बाद मत करिए. इस भोंडेपन का प्रदर्शन आप केवल अपने कमरे में कर सकते हैं. बाहर जाकर आपको मर्यादा में रहना पड़ेगा, नहीं तो आपको कार्यस्थल से निकाल दिया जाएगा. परिवार वाले भी आपका भोंडापन नहीं झेलेंगे और आपके सामने एक बंद रास्ते तथा अंधकारमय जीवन के अलावा कुछ नहीं बचेगा.
“भोंडे बन जाइए ताकि आप जेल तक पहुंच जाएं”
भाजपा सांसद ने कहा कि वैसे अगर देखा जाए तो विज्ञान भी कहता है कि मानव जीवन का उद्देश्य विकास और आत्मोन्नति है. शास्त्र भी कहते हैं कि आप पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ अर्थात पुरुषोत्तम बनने की दिशा में आगे बढ़ें. लेकिन यह अतिवादी नारीवाद आपको सिखा रहा है कि आप पशुवत बनिए, अपने गले में मानो पट्टा डाल लीजिए, पशु जैसी प्रवृत्तियों का प्रदर्शन कीजिए और पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाइए, भोंडे बन जाइए ताकि आप जेल तक पहुंच जाएं. आपको तय करना है कि आपको कौन सही मार्गदर्शन दे रहा है और कौन सही दिशा दिखा रहा है. मैं यही कहूंगी कि मैंने अपने बड़ों और अपने गुरुओं से जो ज्ञान सीखा है, वह यही है कि यह जीवन हमें आत्मविकास और उत्कर्ष के लिए मिला है, पतन और पशुवत प्रवृत्तियों में लौटने के लिए नहीं. इसलिए कृपया आत्मविकास की ओर बढ़िए और सभी को गुरु पूर्णिमा की बहुत-बहुत शुभकामनाएं.
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