CAPF Bill 2026:केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026(CAPF Bill 2026) को आज(1 अप्रैल) राज्यसभा में ध्वनिमत से पास कर दिया गया है. इस दौरान विपक्ष ने बिल को संसद की चयन समिति को भेजने की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया. सदन से बाहर आने के बाद विपक्ष के नेताओं ने CAPF बिल का विरोध किया है. इसी कड़ी में AAP सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने कहा कि दुख की बात है कि देश के 15 हज़ार किलोमीटर की रक्षा करने वाले हमारे जवान और CAPF के अधिकारियों के हक को मारने के लिए सरकार कानून लेकर आई है. यह 50 वर्षों की लड़ाई है. मुर्ली मनोहर जोशी, पी. चिदंबरम और तमाम अधिकारियों की कमेटी आई जिन्होंने यह रिपोर्ट दी कि CAPF के अधिकारियों को भी प्रमोशन मिलना चाहिए लेकिन सरकार ने यह काला कानून पास किया है. देश के 11 लाख CAPF जवान सरकार की तानाशाही देख रहे हैं और वक्त आने पर जवाब देंगे.
“मोदी सरकार बहुमत के बल पर उसे रौंद रही है”
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी (Pramod Tiwari) ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने काफी विचार विमर्श करने के बाद जो निर्णय दिया था आज यह मोदी सरकार बहुमत के बल पर उसे रौंद रही है. वह जवान, वह फोर्स जो हमारे लिए अपने प्राणों को न्योछावर करती है. सीमाओं पर हमारी हिफाजत करती है, संसद, देश की रक्षा करती है आज उनके हक पर सरकार डाका डाल रही है. जब इसपर कमेटी बनी तो CAPF के लोगों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला. जो विरोधी दल के लोग हैं उन्होंने वॉकआउट किया, क्योंकि जब आपको सुनना नहीं है, आप वह करने को अमादा हैं जो सुप्रीम कोर्ट भी नहीं चाहता तो उसके लिए हमने मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में वॉकआउट किया है.
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“भाजपा देश में विभाजनकारी सोच लाई है”
शिवसेना(UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने कहा कि जिस तरीके से भाजपा देश में विभाजनकारी सोच लाई है उसी तरीके से सशस्त्र बल में भी विभाजन करने की कोशिश की जा रही है. यहां पर चर्चा चल रही थी सबकी बात सुनकर सबके मन में क्या है सबका विश्वास जीतना जरूरी था यहां पर उन्होंने हतोत्साहित करने का काम किया है और जिस तरीक से बिल लाया गया है सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के ऊपर काम हो रहा है तो दिख रहा है कि ये सरकार मनमानी कर रही है इसके विरोध में आज हमने वॉकआउट किया है.
“जवानों के साथ नाइंसाफी हो रही है”
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी (Renuka Chaudhary) ने कहा कि संसद में जब हम खड़े होकर सवाल करते हैं तो हम जवाब की उम्मीद करते हैं. जो जवानों के साथ नाइंसाफी हो रही है वह लोगों को समझ आ रहा है. हम लोगों की आवाज़ उठाएंगे. जवाब नहीं मिलने पर हम बैठे रहें और उनकी झूठी बातें सुनते रहें ऐसा नहीं होगा इसलिए हमने वॉकआउट किया. मल्लिकार्जुन खरगे ने मुद्दों पर सवाल उठाया, एक का भी जवाब नहीं मिला.



