Election Results 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बीजेपी ने हिंदुत्व की ऐसी रणनीति अपनाई, जो उत्तर भारत के पारंपरिक मॉडल से अलग दिखी. माछ-भात और मां काली के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव बनाते हुए पार्टी ने हिंदू वोटरों को साधने की कोशिश की. दूसरी ओर असम में मुस्लिम वोटों का बंटवारा विपक्ष के लिए नुकसानदेह साबित हुआ. बंगाल में लंबे समय से सत्ता में रही टीएमसी को एंटी-इनकंबेंसी, महिला वोटबैंक और स्थानीय मुद्दों के बीच चुनौती मिली. बीजेपी ने इन सभी कारकों को मिलाकर एक ऐसा नैरेटिव तैयार किया, जिसने चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया.
वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) का असर
बंगाल में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा. आंकड़ों के अनुसार हटाए गए वोटरों में बड़ी संख्या हिंदुओं की थी, लेकिन मुस्लिम वोटरों पर भी इसका असर पड़ा. कई सीटों पर हटाए गए वोट जीत-हार के अंतर से ज्यादा थे, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए.
15 साल की सत्ता और एंटी-इनकंबेंसी
टीएमसी की लंबे समय से सत्ता में मौजूदगी उसके खिलाफ गई. 15 साल के शासन के बाद जनता में बदलाव की इच्छा दिखी. पार्टी ने कई उम्मीदवार बदले, लेकिन भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और स्थानीय मुद्दों पर विपक्ष के हमले असरदार रहे.
महिलाओं को साधने की रणनीति
बीजेपी ने महिला वोटरों को आकर्षित करने के लिए हर महीने ₹3000 देने और 33% आरक्षण जैसे वादे किए. महिला सुरक्षा के मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया गया. चर्चित मामलों से जुड़े चेहरों को टिकट देकर पार्टी ने इस नैरेटिव को मजबूत किया.
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स्थानीय मुद्दों और नैरेटिव की लड़ाई
बीजेपी ने घुसपैठ, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी. संदेशखाली और आरजी कर जैसी घटनाओं को सरकार की विफलता के तौर पर पेश किया. इन सभी रणनीतियों ने मिलकर चुनावी माहौल को बीजेपी के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभाई.
माछ-भात और मां काली के जरिए बदला हिंदुत्व का चेहरा
बंगाल में बीजेपी ने हिंदुत्व को स्थानीय संस्कृति से जोड़ते हुए पेश किया. ‘जय श्रीराम’ के बजाय ‘जय मां काली’ का नारा और मछली खाने को लेकर खुला समर्थन इसी रणनीति का हिस्सा था. ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी नेताओं ने माछ-भात को बंगाली पहचान बताया. इससे पार्टी ने यह संदेश दिया कि वह स्थानीय परंपराओं के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके साथ है.
मुस्लिम वोटों के बंटवारे ने बिगाड़ा विपक्ष का गणित
असम और बंगाल दोनों जगह मुस्लिम वोटों का एकजुट न रहना विपक्ष के लिए नुकसानदायक रहा. अलग-अलग दलों में वोट बंटने से बीजेपी को सीधा फायदा मिला. इससे कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और जीत का अंतर प्रभावित हुआ.



