KBP Times

सुप्रीम कोर्ट का आदेश; बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता

Supreme court order to senior citizens

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि सीनियर सिटीजन्स अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार है।

इलाहाबाद का आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को रद्द किया गया था। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों की गरिमा के लिए ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से निकालने का आदेश देने का अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि कानून का मकसद बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा तय करना है। सभ्य समाज का स्तर अक्सर इस बात से तय होता है कि वह अपने बुजुर्गों को कितनी गरिमा, सम्मान और सुरक्षा देता है।

लखनऊ के मकान से जुड़ा मामला

यह मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील से जुड़ा था। गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से निकालने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था। यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी। मामला तब सामने आया, जब गुप्ता की 81 साल की मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। एसडीएम ने 15 नवंबर 2022 को बेटे की बेदखली का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इसे बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने बेदखली का आदेश रद्द किया था

बेटे और बहू ने SDM और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि 2007 का कानून बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद दोनों आदेश रद्द कर दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में दखल देकर गलती की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 7 के तहत ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं और धारा 8 उन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां देती है। वहीं, धारा 27 सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाती है। इसलिए ट्रिब्यूनल को कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी है।

कोर्ट ने 2021 के फैसले का भी हवाला दिया

कोर्ट ने एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर (2021) मामले का हवाला देते हुए कहा कि माता-पिता या वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। यानी संपत्ति से बच्चों को हटाना भी बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा का एक तरीका हो सकता है। कोर्ट ने बताया कि यही कानूनी स्थिति बाद में समटोला देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2025) और कमलकांत मिश्रा बनाम एडिशनल कलेक्टर (2025) मामलों में भी दोहराई गई।

यह भी पढ़ें –Alert ; देश में हर घर की रसोई होगी प्रभावित, बढ़ने वाली है मंहगाई

यह भी देखें – गोनेर में सीवरेज संकट से हाहाकार! घरों में घुसा गंदा पानी, सड़क पर उतरे ग्रामीण | Jaipur News

 

ताजा खबरें

ताजा खबरें

Action by India on Pak high commission

इस्लामाबाद की कार्रवाई का रातों रात जवाब दिया दिल्ली ने, पाक हाई कमीशन के बाहर चला बुलडोजर

India-Pakistan

हॉकी का वर्ल्ड कपः भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराया

Prabodh Bodh

जयपुर के उपन्यासकार गोविल के व्यक्तित्व पर पुस्तक ‘प्रबोध बोध’ का लोकार्पण

Satyendar Jain Arrest

सत्येन्द्र जैन की गिरफ्तारी पर AAP-BJP में जुबानी जंग तेज, जाने किसने क्या कहा?

Khetram naval in ajmer

अजमेर में खेताराम नवल बोले- निकाय-पंचायत चुनाव में भाजपा को करारा जवाब देगी कांग्रेस

Urbal Local Bodies election

राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को शहरी निकायों के चुनाव, 14 सितंबर को रिजल्ट, आचार संहिता लागू

Supreme court order to senior citizens

सुप्रीम कोर्ट का आदेश; बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता

RJD protest in patna

पटना में राजद का प्रदर्शन, राजभवन तक निकाला मार्च, पुलिस ने वाटर कैनन चलाई

Operation Sindoor

ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को पाक ने बताया प्रोपेगेंडा, कहा-यह एक तरफा, हकीकत नहीं

2

2