JP Morgan Report : भारत में मध्यम वर्ग की लाइफस्टाइल पर मंहगाई ने पहले ही बडा असर डाला है और अब मल्टीनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म जेपी मॉर्गन ने एक रिपोर्ट जारी कर देश में 2027 तक खाने-पीने की चीजों के दाम काफी बढ़ जाने के संकेत दे दिए हैं। इससे भारत में सबसे अधिक मध्यम और निम्न वर्ग तो प्रभावित होगा ही साथ ही उच्च और उच्च मध्यम वर्ग भी अछूते नहीं रहेंगे। रिपोर्ट में भारत सरकार पर भी 3 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी का बोझ बढने की संभावना जताई है।
इस तरह से प्रभावित होगी हर घर की रसोई
दरअसल रिपोर्ट में कहा गया है कि मंहगाई के लिए खाडी के देशों में युद्व के हालात जिम्मेदार हैं। दुनिया का 42 परसेंट यूरिया और 27 परसेंट अमोनिया (खाद बनाने का केमिकल) मिडिल ईस्ट यानी अरब देशों से आता है। अगर वहां युद्ध या तनाव के कारण सप्लाई रुकी, तो पूरी दुनिया में खाद की भारी किल्लत हो जाएगी और दाम आसमान छूने लगेंगे। यूरिया जैसी खाद बनाने में नेचुरल गैस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। अगर गैस महंगी हुई, तो खाद बनाना भी महंगा हो जाएगा। खाद महंगी होने पर किसान इसका कम इस्तेमाल करेंगे, जिससे फसलों की पैदावार घट जाएगी। अगर एक बार खाद के कारखाने या गैस प्लांट इस संकट की वजह से बंद या प्रभावित हुए, तो उन्हें दोबारा पूरी तरह ठीक होने में 1 से 5 साल तक का लंबा समय लग सकता है।
पूरी दुनिया पर असर
जेपी मॉर्गन फर्म ने दावा किया है कि महंगाई का असर पूरी दुनिया पर होगा। फर्टिलाइजर की कमी, जियोपॉलिटिकल तनाव के साथ एक शक्तिशाली अल नीनो तूफान के आने से यह संकट गहराएगा। साल 2027 की पहली छिमाही में ग्लोबल स्तर पर खाने-पीने की चीजों के दाम 5 परसेंट तक बढ़ सकते हैं। 2026 की पहली छिमाही में यह आंकड़ा 2.8 परसेंट पर था। भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए अधिक मायने रखती है, क्योंकि देश पहले से ही खाद काफी महंगी है।
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