Fashion : जब भी देश में स्वतंत्रता दिवस आता है तो हमेशा हमारे जेहन में कुर्बानियां, आंदोलन और जलसे याद आते हैं। भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हमारी कपडों की अलमारी से भी गहरानाता है। उस दौर में जो कपड़े सिर्फ एक राजनीतिक संदेश या जरूरत का हिस्सा थे, वे आज के दौर में देश के सबसे बड़े फैशन स्टेटमेंट बन चुके हैं। इस साल के स्वतंत्रता दिवस पर जानते हैं उन एवरग्रीन फैशन ट्रेंड्स के बारे में, जो आजादी के आंदोलन से निकले और आज भी हमारे स्टाइल का अहम हिस्सा बने हुए हैं –
महात्मा गांधी और ‘खादी’
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी को सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक हथियार बनाया था. उस समय चरखे पर काता गया यह साधारण सा कपड़ा आज ‘लक्जरी फैशन’ का हिस्सा बन चुका है. इको-फ्रेंडली और समर-फ्रेंडली होने की वजह से आज के यूथ में खादी के कुर्ते, शर्ट्स और जैकेट्स का जबरदस्त क्रेज है. बड़े-बड़े फैशन डिजाइनर्स खादी को इंटरनेशनल रैंप पर शोकेस कर रहे हैं।
जवाहरलाल नेहरू की शेरवानी और ‘नेहरू जैकेट’
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का ड्रेसिंग सेंस हमेशा चर्चा में रहा। उनकी सिग्नेचर शेरवानी (लॉन्ग कोट) और ‘नेहरू जैकेट’ आज भी भारतीय पुरुषों के एथनिक वेयर का सबसे पसंदीदा हिस्सा हैं. किसी भी शादी-ब्याह, त्योहार या फॉर्मल इवेंट में नेहरू जैकेट पहनना सबसे सेफ और क्लासी ऑप्शन माना जाता है. इसे कुर्ते-पायजामे से लेकर वेस्टर्न शर्ट और जींस के साथ भी पेयर किया जा सकता है।
‘गांधी टोपी’ सादगी से लेकर यूथ का स्टाइल
सफेद सूती कपड़े से बनी गांधी टोपी आजादी के दौर में एकजुटता का प्रतीक थी. स्वतंत्रता सेनानियों की पहचान बनी यह टोपी आज के समय में फ्यूजन फैशन और पॉलिटिकल इवेंट्स में खूब पसंद की जाती है. गणेश उत्सव हो, आजादी का जश्न हो या कोई रैली, गांधी टोपी आज भी सादगी और देशभक्ति का तड़का लगाने के काम आती है।
महिलाओं के लिए स्वदेशी कॉटन साड़ियां
आजादी के आंदोलन में महिलाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया था. उस दौर में सरोजिनी नायडू और अरुणा आसफ अली जैसी महान महिलाओं ने साधारण सूती और हाथ से बनी साड़ियों को पहचान दी. विदेशी कपड़ों के बहिष्कार के बाद भारतीय हथकरघा साड़ियों का दबदबा बढ़ा. आज वही सूती, चंदेरी और खादी साड़ियां वर्किंग विमेन की पहली पसंद हैं. यह न केवल एलिगेंट दिखती हैं, बल्कि बेहद आरामदायक भी होती हैं।
कोल्हापुरी चप्पल और जूती- देसी वाइब का जादू
स्वदेशी आंदोलन के दौरान भारतीय कारीगरों के बनाए सामानों को बढ़ावा दिया गया, जिसमें चमड़े और सूती धागों से बनी पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलें और जूत्तियां शामिल थीं. आज यह फुटवेयर ट्रेंड हर लड़की और लड़के की अलमारी में मिल जाएगा. एथनिक सूट हो या जींस-टॉप, कोल्हापुरी चप्पल हर आउटफिट को एक परफेक्ट ‘देसी लुक’ देती है।
फैशन जो सिर्फ ट्रेंड नहीं, देश की पहचान भी
आजादी के आंदोलन से निकले ये स्टाइल आज सिर्फ पुराने जमाने की यादें नहीं हैं, बल्कि आधुनिक भारत के कूल और सस्टेनेबल फैशन का हिस्सा हैं. तो इस 15 अगस्त, आप भी इनमें से अपना पसंदीदा एथनिक लुक चुनिए और इस आजादी के जश्न को थोड़े देसी टैलेंट और स्टाइल के साथ सेलिब्रेट कीजिए!
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