Monsoon Session 2026: संसद का मॉनसून सत्र आज गुरुवार को खत्म हो गया है. 25 दिनों तक चला मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहा. इस दौरान लोकसभा व राज्यसभा दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जबरदस्त नोंकझोंक देखने को मिली. हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 12 बिलों को पास करवाने में सफल रही. मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि मानसून सत्र एक नेता के अहंकार, अनुशासनहीनता और उदंडता की भेंट चढ़ गया. राहुल गांधी अपनी बहन के साथ बिना अनुमति प्रधानमंत्री आवास के गेट पर बैठ गए. राहुल गांधी के पिता, दादी, परनाना प्रधानमंत्री रहे हैं. प्रधानमंत्री के निवास का क्या महत्व होता है वो उनको मालूम है. NEET पर बड़ा कानून आया केवल उसी पर सदन में बहस हुई, राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. वे बार-बार कहते थे गृह मंत्री पुलिस कार्रवाई पर जवाब दें.
रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि जब गृह मंत्री ने कहा कि वे 24 घंटे बहस सुनने को तैयार हैं और उनके तर्कों का जवाब देने को तैयार हैं तो फिर उन्होंने कहा अगर उन्होंने गोली चलाने का आदेश दिया है तो त्याग पत्र दें. क्या राहुल गांधी को शासन की मूलभूत समझदारी नहीं है? कभी गृह मंत्री के आदेश पर गोली चलती है क्या? वहां पुलिस के अधिकारी होते हैं, उनसे पूछकर कार्रवाई की जाती है.
“कांग्रेस ने काला दाग लगा दिया है”
भाजपा नेता शहनवाज़ हुसैन ने कहा कि संसद के इतिहास में कांग्रेस ने काला दाग लगा दिया है. पूरा सत्र हंगामें की भेंट चढ़ गया. जिस तरह की हरकत कांग्रेस ने की है और विपक्ष ने की है. जो लोग भी लोकतंत्र में आस्था रखते हैं वे कभी क्षमा नहीं करेंगे. जिस तरह कांग्रेस ने शर्त पर शर्त रखी, राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर पूरे विपक्ष को गुमराह किया. संसद चलने नहीं दी.
“घमंड के अलावा कोई कारण नहीं”
वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मानसून सत्र में जो भी चर्चा होनी थी और जो भी उत्पादक कार्य होना था, वो नहीं हो पाया और ऐसा सिर्फ एक इंसान के अहंकार के कारण नहीं हुआ. एक तो पूरा सत्र में देरी हुई और इसका घमंड के अलावा कोई कारण नहीं है. ये (विपक्ष) लोग मांग करते हैं और जब इनकी मांग स्वीकार कर ली जाती है तो ये लोग भाग जाते हैं. कल खुद गृह मंत्री ने कहा कि वो जवाब देंगे तो खुद तो इन्होंने मुद्दा बदल दिया कि इस्तीफा चाहिए. ये झारखंड में क्यों नहीं जा रहे हैं? अगर झारखंड ने ठीक नहीं किया है तो आपने क्या किया है? वो आपके मंत्री हैं, वो वहां कैसे बात कर रहे हैं? आप उनको चेतावनी क्यों नहीं दे रहे हैं?
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