CJP Protest: दिल्ली में केन्द्र सरकार की ओर से सीजेपी को बातचीत के लिए लगातार न्यौता दिया जाता रहा लेकिन उधर सीजेपी कहती रही कि सरकार को बात करनी है तो हम उनके ऑफिस या घर नहीं जाएंगे उन्हे यहां जंतर-मंतर पर जनता के बीच आना होगा। एक दूसरे घटनाक्रम में सीजेपी ने अपने आंदोलन को देशभर में फैलाने के लिए 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। शुक्रवार को सभी राज्यों में युवाओं से प्रदर्शन किए जाने की अपील की है।
दिल्ली में प्रदर्शन जारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के समर्थन सोनम वांगचुक के अनशन का आज 26वां दिन हैं। वांगचुक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं।
सीजेपी का प्रदर्शन अब राष्ट्रीय मुद्दा बना
करीब एक महीने में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। शुरुआती सख्ती के बाद अब सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। आंदोलन देश भर में फैला- सोनम वांगचुक के अनशन, छात्रों की लगातार मौजूदगी और कई राज्यों से मिले समर्थन ने प्रदर्शन को देशभर में फैला दिया है। जन आंदोलन में तब्दील हो रहा- शुरुआती दिनों में सरकार ने बैरिकेडिंग, हिरासत और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाईं। बाद में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सीजेपी का समर्थन किया। अब यह जन आंदोलन में बदलता दिख रहा है। संसद मार्च के बाद सरकार का रुख बदला- 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद सरकार बातचीत के लिए तैयार हुई।
कांग्रेस के अचानक प्रदर्शन से सरकार घिरी
21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को बातचीत करने के लिए भेजा। विपक्ष अब सदन में पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा है। संसद चल नहीं पा रही है।
सीजेपी का नड्डा के घर पर बातचीत से इनकार क्यों- 22 और 23 जुलाई को सरकार ने सीजेपी को कई बार औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन बैठक की जगह पर सहमति नहीं बन सकी। पहली बैठक 20 जुलाई को नड्डा के घर हुई थी। यह बेनतीजा रही थी। यदि बातचीत फिर नड्डा के घर या ऑफिस में होती, तो प्रदर्शन पर सीजेपी के साथ राजनीतिक बातचीत का ठप्पा लग सकता था। सीजेपी प्रदर्शन को लगातार छात्र आंदोलन बता रहा है। ऐसे में वह किसी राजनीतिक दल के दफ्तर में जाकर अपनी निष्पक्ष छवि कमजोर नहीं करना चाहता। जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल वेन्यू पर मिलने से यह संदेश जाएगा कि बातचीत बराबरी की स्थिति में हो रही है।
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