CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर से 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जबरन हटाने और 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों पर लाठीचार्ज मामले पर दायर जनहित याचिकाओं पर आज बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि CJP का प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था बल्कि प्रदर्शन में शामिल कुछ तत्वों ने हिंसा का सहारा लिया था. साथ ही कहा कि इस मामले में याचिकाएं सिर्फ प्रचार हासिल करने के लिए दाखिल की गई हैं.
“छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हुई”
याचिकाकर्ता की तरफ से वकील एन हरिहरन ने कोर्ट में कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था, बिना किसी वार्निंग के लाठीचार्ज किया गया. ऐसा तो कोलोनियल टाइम में भी नहीं हुआ. ऐसी कार्रवाई को आर्टिकल 14 के तहत मनमानी की कसौटी पर परखा जाएगा. उन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हुई, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
वहीं एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि 20 दिन से प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे हुए थे, सोनम वांगचुक ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे 20 जुलाई को संसद मार्च करेंगे. इसके बावजूद छात्रों पर हमला किया गया. संसद मार्च में सभी क्षेत्रों के बच्चे पहुंचे थे. आज तक इस बात की कोई चर्चा नहीं है कि वहां इकट्ठा लोगों ने हिंसा की हो. जबकि कई वायरल वीडियो में सादी वर्दी में लोग लाठियां लिए दिख रहे हैं उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया.
“पूरी घटना की जांच होनी चाहिए”
वकील एन हरिहरन ने आगे कहा कि कीलें लगी लाठियों से बच्चों को पीटा गया. पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए. पूरी घटना की जांच होनी चाहिए. 90 से ज्यादा छात्र घायल हैं. ऐसी स्थिति में लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी को क्या कोड ऑफ कंडक्ट बनाए रखना है इसके बारे में डायरेक्शन पास किए जाने चाहिए.
हाईकोर्ट ने पुलिस से 4 हफ्ते में मांगा जवाब
वहीं मामले पर हाईकोर्ट की तरफ से दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. अगले 4 हफ्ते में पुलिस के जवाब पर याचिकाकर्ता अपना जवाब दाखिल करेंगे. मामले पर अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी. दिल्ली पुलिस को हाईकोर्ट ने बॉडी कैमरा फुटेज और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं.
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