ISI : गुजरात एटीएस ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आठ आतंकियों को गुजरात और मध्य प्रदेश से पकड़ा है। सभी को अलग अलग जिलों से पकड़ा गया है। इनमें से दो की उम्र 18 और 19 साल है। ये सभी गुजरात में श्रमड का एक एक्टिव नेटवर्क बनाने के लिए काम कर रहे थे, ताकि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया सके। एटीएस ने इनसे पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान में पाकिस्तान के नेटवर्क को लेकर इंटेलिजेंस के सामने नए खुलासे हो रहे हैं। राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) की पूछताछ में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के फंडिंग एजेंट रफीक चांद शेख ने कई खुलासे किए हैं। आरोपी पिछले 4 साल से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) से जुड़ा हुआ था और मुर्गी फार्म की आड़ में भारत में फंडिंग का काम संभाल रहा था। ISI उसे इस काम के बदले 3 से 5 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन देती थी।
जल्द और गिरफ्तारियां संभव
फिलहाल सीआईडी आरोपी से पूछताछ में जुटी है, जिससे जल्द ही देश में छिपे अन्य पाकिस्तानी जासूसों की गिरफ्तारी हो सकती है। इंटेलिजेंस की टीम आरोपी को लेकर औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में उसके ठिकानों की जांच में जुटी है।
3 से 5 प्रतिशत तक कमीशन पर काम
सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख (41) को 30 जून को गिरफ्तार किया था। आरोपी रफीक पिछले चार साल से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) केे लिए भारत में फंडिंग का काम संभाल रहा था। आईएसआई द्वारा भारतीय जासूसों को दी जाने वाली रकम रफीक के जरिए ही पहुंचाई जाती थी। लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के शक से बचने के लिए उसने दिखावे के लिए एक मुर्गी फार्म खोल रखा था। इसी पोल्ट्री फार्म की आड़ में वह आईएसआई के इशारे पर भारत में सक्रिय जासूसों को जासूसी के बदले पैसे बांटता था। इस काम के एवज में आईएसआई उसे 3 से 5 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन देती थी।
महज 5वीं पास है आरोपी
जानकारी के अनुसार जांच में सामने आया कि महज 5वीं पास रफीक बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। वह आईएसआई के तीन संदिग्ध नंबरों के लगातार संपर्क में था, जिनमें से एक नंबर पाकिस्तान का और दो अन्य देशों के हैं। ISI के इस फंडिंग एजेंट के पास से 7-8 बैंक खाते मिले हैं। इन्हीं बैंक खातों का इस्तेमाल वह जासूसी करने वाले एजेंटों के खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए करता था।
बिटकॉइन के जरिए आती थी फंडिंग
जानकारी के अनुसार सीआईडी ने रफीक के सभी सक्रिय बैंक खातों को सीज करवा दिया है। संदिग्ध लेन-देन के कारण उसके कई बैंक खाते पहले भी बंद हो चुके थे। रफीक के खातों में ऑनलाइन ट्रेडिंग और बिटकॉइन (क्रिप्टोकरेंसी) के जरिए पैसा भेजा जा रहा था। जब उसके खुद के खाते बंद हो गए, तो उसने अपने रिश्तेदारों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। सीआईडी की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसके आधार पर भारत में छिपे अन्य पाकिस्तानी जासूसों की जल्द गिरफ्तारी होने की पूरी संभावना है।
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