Yamuna Water Agreement: करीब तीन दशक से लंबित यमुना जल विवाद आज (29 जून) सुलझ गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर हुए.इस समझौते के तहत 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के अनुसार राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है.सरकार का दावा है कि इससे राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को राहत मिलेगी, जबकि विशेषज्ञ हरियाणा के छह जिलों में भूजल रिचार्ज कम होने की आशंका जता रहे हैं.
राजस्थान को कितना मिलेगा पानी?
समझौते के अनुसार राजस्थान को 33,379 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना में क्षमता से अधिक पानी केवल मानसून के दौरान लगभग 25 से 30 दिन ही आता है.ऐसे में जुलाई से अक्टूबर तक पूरे चार महीने लगातार पानी मिलना व्यवहारिक रूप से आसान नहीं होगा.फिर भी सरकार इसे राजस्थान, विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मान रही है.
3900 करोड़ की पाइपलाइन परियोजना
राजस्थान तक यमुना का पानी पहुंचाने के लिए करीब 300 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी.यह पाइपलाइन हरियाणा के हथिनीकुंड से शुरू होकर राजस्थान तक पहुंचेगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 3900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. भूमि अधिग्रहण, निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां दोनों राज्यों के बीच तय की जाएंगी.
तीन बड़े बांधों को भी मिलेगी रफ्तार
एमओयू के बाद रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है.इन परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना बेसिन में जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी.इससे पेयजल आपूर्ति मजबूत होगी और सिंचाई के लिए भी अधिक पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा. केंद्र सरकार का कहना है कि यह समझौता राज्यों के बीच जल प्रबंधन और सहयोग का नया मॉडल बनेगा.
हरियाणा के छह जिलों पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त पानी राजस्थान भेजे जाने से हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिलों में भूजल रिचार्ज कम हो सकता है.उनका कहना है कि मानसून के दौरान जो अतिरिक्त पानी जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाता था, उसका एक हिस्सा अब राजस्थान की ओर मोड़ दिया जाएगा। विपक्ष भी इसी आधार पर सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहा है.
1994 का समझौता क्या कहता है?
अपर यमुना रिवर बोर्ड के 1994 के समझौते के अनुसार यमुना नदी के पानी का बंटवारा हरियाणा को 40.6 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश को 35.1 प्रतिशत, राजस्थान को 10.4 प्रतिशत, दिल्ली को 6.3 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश को 1.7 प्रतिशत दिया गया था.अब नए एमओयू के जरिए राजस्थान को उसके निर्धारित हिस्से का पानी उपलब्ध कराने की दिशा में व्यावहारिक प्रक्रिया शुरू की गई है.
शेखावाटी के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र लंबे समय से गंभीर जल संकट और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहा है.स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन वर्षों से यमुना जल उपलब्ध कराने की मांग करते रहे हैं.ऐसे में इस परियोजना को क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल समाधान के रूप में देखा जा रहा है.हालांकि इसके सफल क्रियान्वयन और वास्तविक जल उपलब्धता पर ही इसकी सफलता निर्भर करेगी.
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेंगे अयोध्या के वकील, बार एसोसिएशन का फैसला



