KBP Times

32 साल बाद सुलझा हरियाणा-राजस्थान के बीच ‘यमुना जल बंटवारे’ का विवाद, 3900 करोड़ की पाइपलाइन से पहुंचेगा पानी

Yamuna Water Agreement

Yamuna Water Agreement: करीब तीन दशक से लंबित यमुना जल विवाद आज (29 जून) सुलझ गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर हुए.इस समझौते के तहत 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के अनुसार राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है.सरकार का दावा है कि इससे राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को राहत मिलेगी, जबकि विशेषज्ञ हरियाणा के छह जिलों में भूजल रिचार्ज कम होने की आशंका जता रहे हैं.

राजस्थान को कितना मिलेगा पानी?
समझौते के अनुसार राजस्थान को 33,379 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना में क्षमता से अधिक पानी केवल मानसून के दौरान लगभग 25 से 30 दिन ही आता है.ऐसे में जुलाई से अक्टूबर तक पूरे चार महीने लगातार पानी मिलना व्यवहारिक रूप से आसान नहीं होगा.फिर भी सरकार इसे राजस्थान, विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मान रही है.

3900 करोड़ की पाइपलाइन परियोजना
राजस्थान तक यमुना का पानी पहुंचाने के लिए करीब 300 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी.यह पाइपलाइन हरियाणा के हथिनीकुंड से शुरू होकर राजस्थान तक पहुंचेगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 3900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. भूमि अधिग्रहण, निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां दोनों राज्यों के बीच तय की जाएंगी.

तीन बड़े बांधों को भी मिलेगी रफ्तार
एमओयू के बाद रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है.इन परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना बेसिन में जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी.इससे पेयजल आपूर्ति मजबूत होगी और सिंचाई के लिए भी अधिक पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा. केंद्र सरकार का कहना है कि यह समझौता राज्यों के बीच जल प्रबंधन और सहयोग का नया मॉडल बनेगा.

हरियाणा के छह जिलों पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त पानी राजस्थान भेजे जाने से हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिलों में भूजल रिचार्ज कम हो सकता है.उनका कहना है कि मानसून के दौरान जो अतिरिक्त पानी जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाता था, उसका एक हिस्सा अब राजस्थान की ओर मोड़ दिया जाएगा। विपक्ष भी इसी आधार पर सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहा है.

1994 का समझौता क्या कहता है?
अपर यमुना रिवर बोर्ड के 1994 के समझौते के अनुसार यमुना नदी के पानी का बंटवारा हरियाणा को 40.6 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश को 35.1 प्रतिशत, राजस्थान को 10.4 प्रतिशत, दिल्ली को 6.3 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश को 1.7 प्रतिशत दिया गया था.अब नए एमओयू के जरिए राजस्थान को उसके निर्धारित हिस्से का पानी उपलब्ध कराने की दिशा में व्यावहारिक प्रक्रिया शुरू की गई है.

शेखावाटी के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र लंबे समय से गंभीर जल संकट और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहा है.स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन वर्षों से यमुना जल उपलब्ध कराने की मांग करते रहे हैं.ऐसे में इस परियोजना को क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल समाधान के रूप में देखा जा रहा है.हालांकि इसके सफल क्रियान्वयन और वास्तविक जल उपलब्धता पर ही इसकी सफलता निर्भर करेगी.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेंगे अयोध्या के वकील, बार एसोसिएशन का फैसला

 

ताजा खबरें

ताजा खबरें

Rahul Gandhi and congress

दिल्ली से फोन… जयपुर में धरना, क्या यही कांग्रेस का एजेंडा?

Strike Against Adulteration

मिलावट पर वार; केंद्रीय खाद्य सुरक्षा दल की झोटवाड़ाऔर मुहाना मंडी की फर्मों पर कार्रवाई

CJP and Delhi High Court

दिल्ली कोर्ट ने आशुतोष-सौरव की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाई; CJP का रिहाई में जानबूझकर देरी का आरोप

Pratap singh Khachriyawas

जयपुर में प्रताप खाचरियावास का आरोप- VLTD डिवाइस के नाम पर 1000 करोड़ का घोटाला

Shashi Tharoor MP

कांग्रेस सांसद थरूर बोले- हमारा मकसद SIR प्रक्रिया को वापस लेना, सरकार गिराना टारगेट नही

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने दी दुष्कर्म की नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की इजाजत

Cartoon

मास्टर जी सावधानी रखना…

selection commettee

BCCI में फेरबदल; प्रज्ञान ओझा चीफ सिलेक्टर बने, कमेटी में रमेश पोवर को किया शामिल

Questions of Oppositions

सत्ता से सवाल पूछने वाले खुद पर आरोपों का जवाब देंगे कब ?

2

2