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कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड जीतने वाले दिग्गज शूटर जशपाल राणा का निधन, मनु भाकर को भी दी थी कोचिंग

Jaspal Rana Death

Jaspal Rana Death: भारतीय खेल इतिहास के सबसे दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का आज (12 जून) निधन हो गया. उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. एक जून की रात को जर्मनी के म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में 49 वर्षीय जसपाल राणा की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट कालीकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की पुष्टि की है. कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले जसपाल राणा ने न सिर्फ देश को गौरव दिलाया, बल्कि एक सफल कोच के रूप में नई पीढ़ी के निशानेबाज भी तैयार किए.

गढ़वाल से ग्लोबल पहचान तक
28 जून 1976 को उत्तराखंड के गढ़वाली परिवार में जन्मे जसपाल राणा का जीवन खेलों से जुड़ा रहा. उनके पिता नारायण सिंह राणा सेना में अधिकारी थे और बाद में राज्य के पहले खेल मंत्री बने. बचपन से ही उन्हें निशानेबाजी का प्रशिक्षण मिला. महज 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाकर उन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य के संकेत दे दिए थे.

अंतरराष्ट्रीय करियर की धमाकेदार शुरुआत
1988 में अहमदाबाद राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर राणा चर्चा में आए. 1994 में मिलान में जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. इसके बाद 1996 अटलांटा ओलंपिक 1996 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर फ्री पिस्टल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया.

कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में दबदबा
जसपाल राणा का नाम कॉमनवेल्थ गेम्स के सबसे सफल भारतीय खिलाड़ियों में शामिल है. उन्होंने कुल 15 पदक (9 स्वर्ण, 4 रजत, 2 कांस्य) जीते. 2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स 2002 में 6 पदक जीतना उनके करियर का स्वर्णिम पल रहा. 2006 दोहा एशियन गेम्स 2006 में उन्होंने 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीतकर इतिहास रचा. 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में 590 अंक बनाकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की.

सम्मान और कोचिंग में योगदान
राणा को अर्जुन पुरस्कार (1994), पद्मश्री (1997) और द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020) से सम्मानित किया गया. खेल से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग को अपना मिशन बनाया. वे मनु भाकर के कोच रहे और कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया. उनकी ट्रेनिंग शैली अनुशासन और उच्च स्तरीय तैयारी के लिए जानी जाती थी. जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है. उन्होंने न सिर्फ खुद पदक जीते, बल्कि भारत को विश्व मंच पर मजबूत पहचान दिलाने वाली पीढ़ी भी तैयार की. उनकी विरासत हमेशा प्रेरणा देती रहेगी.

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