Cockroach Janta Party: पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कॉकरोच जनता पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि षड्यंत्र के कुल्लड़ में जो काकरोची हुल्लड़ दिखाई पड़ रहा है,जो इस षड्यंत्र के कुल्लड़ में जो कॉकरोची हुल्लड़ है, वह कोई बाय चांस नहीं है. यह एक बहुत सोची-समझी सोच और साजिशी मानसिकता का नतीजा है. कुछ लोगों को लगता है कि वे हमारी वाइब्रेंट डेमोक्रेसी को इस तरह की वायलेंट एनार्की के जरिए डिस्टॉय, डिफेम और डिफीट कर पाएंगे, लेकिन यह उनकी गलतफहमी है और मैं मानता हूं कि इस तरह के कॉकरोची हुल्लड़ को देश कभी भी स्वीकार नहीं करेगा. देश लोकतांत्रिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे पर यकीन करता है. सरकारें कोई आए कोई जाए लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि षड्यंत्र के कुल्लड़ में हर दिन आप कॉकरोची हुल्लड़ लेकर देश की डेमोक्रेसी, डेमोक्रेटिक वैल्यूज़ और कॉन्स्टिट्यूशनल वैल्यूज़ में संक्रमण फैलाने की कोशिश करें. यह कभी सफल नहीं होगा.
‘युवाओं को अपनी बात कहने का मंच मिलना चाहिए’
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मैं कॉकरोच जनता पार्टी के तेज़ी से उभरने को लेकर बेहद उत्सुक हूं, जिसने सिर्फ पांच दिनों में ही Instagram पर 1.5 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं. मैं युवाओं की निराशा और गुस्से को समझता हूं और यह भी देख पा रहा हूं कि वे इससे क्यों जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. यही वजह है कि X पर इस अकाउंट को बंद किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और ग़ैर-समझदारी भरा कदम है. युवाओं के पास अपनी भावनाएं व्यक्त करने का एक मंच होना चाहिए, इसलिए CJP के अकाउंट को बंद करने के बजाय उसे चलने दिया जाना चाहिए. लोकतंत्र में असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक कि नाराज़गी के लिए भी जगह होनी चाहिए. मैं इस आंदोलन के भविष्य को लेकर निश्चित नहीं हूं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि इसके पीछे मौजूद युवा इस ऊर्जा को मुख्यधारा की राजनीति में लाने का रास्ता निकालेंगे या फिर अपने वोट के ज़रिए बदलाव की आवाज़ बनेंगे, ताकि उन्हें नज़रअंदाज़ करना असंभव हो जाए. यह एक ऐसा अवसर है जिसे विपक्ष को गंभीरता से लेना चाहिए.
शशि थरूर ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि जिन्होंने यह कहा कि अभिजीत दीपके कांग्रेस की भी उतनी ही आलोचना करते हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि मेरा उद्देश्य किसी एक पार्टी का पक्ष लेना नहीं था, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक मुद्दे की ओर ध्यान दिलाना था.
“प्रतिबंध को हटाएं और युवाओं की आवाज़ को सुनें”
कांग्रेस सांसद ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मैं अपने पोस्ट और इंटरव्यू पर मिले विरोध और प्रतिक्रियाओं का स्वागत करता हूं, जो कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर थे. कई लोगों ने इसे पाकिस्तान द्वारा तैयार की गई साजिश करार दिया, लेकिन मामला इतना सरल नहीं है. दूसरी ओर अभिजीत दीपके का दावा है कि उनके 94% फॉलोअर्स भारत में हैं. सच्चाई चाहे जो भी हो मेरा मूल मुद्दा यही है कि लोकतंत्र में ऐसी चीज़ों को दबाना मूर्खता है. लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह जनता की भावनाओं, निराशाओं और शिकायतों को व्यक्त करने का मंच देता है. इन्हें एक व्यंग्यात्मक मंच पर सामने आने देना राष्ट्रीय हित में है. संस्थापकों की मंशा चाहे जो भी रही हो, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने देश के युवाओं के भीतर मौजूद एक महत्वपूर्ण भावना को पहचान लिया है. हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के संरक्षकों के तौर पर सरकार और विपक्ष दोनों को इस असंतोष को सुनना, समझना और इसके मूल कारणों पर काम करना चाहिए. इसे नज़रअंदाज़ करना, इससे इनकार करना और सबसे ख़तरनाक बात इसे दबाने की कोशिश करना बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है. ऐसे आंदोलन प्रेशर कुकर के सेफ्टी वाल्व की तरह काम करते हैं, जो भीतर जमा दबाव को बाहर निकालते हैं. अगर वाल्व बंद कर दिए जाएं, तो प्रेशर कुकर फट जाएगा. मैं अराजकता, हिंसा या क्रांति की तुलना में व्यंग्य को बेहतर मानता हूं. साथ ही, मुझे लगता है कि युवा भारत की समस्याओं की पहचान करना और उनके समाधान देना हमारी जिम्मेदारी है. इसलिए आइए, इस प्रतिबंध को हटाएं और युवाओं की आवाज़ को सुनें.



