Bhajpa (BJP) : भारतीय जनता पार्टी को अब पश्चिम बंगाल में महिला सीएम के लिए चेहरे की तलाश हैं वैसे तो माना जा रहा है कि सुवेन्दु अधिकारी ही दावेदार होंगे क्योंकि वो ही बंगाल में भाजपा के चेहरे थे और उन्होने दो सीटों पर ममता बनर्जी को हराया है। फिर भी ऐसा कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा किसी महिला को राज्य में सीएम बनाएगी ताकि उसकी देशभर में नारी शक्ति का प्रचार को और मजबूती मिले साथ ही ममता बनर्जी का विकल्प के रुप में भाजपा को महिला चेहरा मिल सके। वहीं असम में हेंमत विस्वा ने चुनाव जितवाकर भाजपा में अपना कद बढाया है निश्चित रुप से उनके लिए केन्द्र में अच्छी स्थिति बनी है। तमिलनाडू में अभिनेता विजय की जीत ने द्रमुक राजनीति को खत्म किया है वहीं केरल में कांग्रेस ने दस साल बाद सत्ता में वापसी कर देश से एकमात्र वामपंथी विचारधारा और सरकार को विदा कर दिया है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट एक दिन पहले चैनलों ने प्रसारित किए एक्जिट पोल के अनुसार ही आए हैं। तमिलनाडू को छोडकर सभी एक्जिट पोल सही ठहरे हैं। भाजपा ने पश्चिम बंगाल जीत लिया, असम में वापसी की और तमिलनाडु व केरलम में सरकारें बदल गईं। पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की।
ममता सहित 12 मंत्री हारे
सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया।
तमिलनाडू में उलटफेर
तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें डीएमके या एआईडीएमके नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एमके स्टालिन चुनाव हार गए।
महिला को मिल सकती है कमान
बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीती हैं। टीएमसी 81 सीटों पर सिमट गई। साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11, पश्चिम मेदिनीपुर की 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं।
मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती
मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली धोती-कुर्ता पहनकर पहुंचे। मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली धोती-कुर्ता पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया।
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SIR से मुस्लिम वोटर्स के नाम कटे
एसआईआर के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और टीएमसी को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। एसआईआर में 63 प्रतिशत (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34 प्रतिशत (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ।
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भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे
शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रुपए दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार रुपए की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया।



