JEE Mains topper: “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”,इस बात को सच कर दिखाया है कोटा के एलन करियर इंस्टीट्यूट के छात्र कबीर छिल्लर ने कबीर ने जेईई मेन्स सेशन-1 की परीक्षा में 300 में से 300 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 (JEE Mains topper) हासिल की है।उनकी इस ऐतीहासिक सफलता ने न केवल उनके परिवार,बल्कि पूरे कोटा कोचिंग जगत को भी गौरवान्वित किया है।खास बात यह है कि सेशन-1 में ही परफेक्ट स्कोर हासिल करने के बाद कबीर ने दूसरे सेशन की परीक्षा में बैठने की जरूरत तक नहीं समझी।
रगों में है इंजीनियरिंग
कबीर मूल रूप से दिल्ली- एनसीआर के गुरुग्राम के रहने वाले हैं।उनकी सफलता के पीछे एक मजबूत शैक्षणिक माहौल है। उनके पिता मोहित छिल्लर खुद एक आईआईटीयन है,जबकि मां प्रियंका छिल्लर एक शिक्षिका हैं।कबीर की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया ज सकता है कि उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी 98% अंक हासिल किए थे।
कबीर की ‘सक्सेस स्ट्रैटेजी
कबीर ने अपनी पढ़ाई के कुछ खाल मंत्र साझा किए हैं,जो हर प्रतियोगी छात्र के लिए प्रेरणा बन सकते हैं जेसै सेल्फ एनालिसिस यानी कि आत्म-विश्लेषण कबीर के अनुसार, केवल टेस्ट देना ही काफी नहीं है वे हर मॉक टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का गहराई से विश्लेषण करते थे और उन कमजोर कड़ियों पर तब तक काम करते थे जब तक वे सुधर न जाएं।और साथ ही क्वालिटी ओवर क्वांटिटी का भी ध्यान रखना जरूरी है, उन्होंने घंटों तक बैठने के बजाय ‘अटेंशन स्पैन’ और पढ़ाई की क्वालिटी पर फोकस किया। छोटे-छोटे टारगेट्स सेट करना और उन्हें पूरा करना उनकी आदत में शामिल था और शॉर्ट नोट्स से रिवीजन करने के भी फायदे बताए उनके अनुसार कॉन्सेप्ट्स को रटने की जगह उन्हें समझने पर जोर देना चाहिए। रिवीजन को आसान बनाने के लिए वे नियमित रूप से शॉर्ट नोट्स तैयार करते थे।कबीर का मानना है कि पढ़ाई के बोझ के बीच मानसिक शांति जरूरी है। वे खुद को रिफ्रेश रखने के लिए दोस्तों के साथ समय बिताते थे, जिससे उनका फोकस और बेहतर होता था।
भविष्य का लक्ष्य
कबीर का विजन पूरी तरह साफ है। वे अब IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस (CS) में बीटेक करना चाहते हैं। इसके बाद उनका सपना दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से उच्च शिक्षा प्राप्त करना है।



