ShriJi Ke Haumanji: राजस्थान में एक नई धार्मिक ऊंचाई जुड़ गई है। नाथद्वारा के गिरिराज पर्वत पर 131 फीट ऊंची विशाल हनुमान प्रतिमा ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ का आज भव्य लोकार्पण कर दिया गया है। यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ के ठीक सामने करीब 500 फीट की ऊंचाई पर स्थापित की गई है।प्रतिमा की कुल ऊंचाई लगभग 13 मंजिला इमारत के बराबर है।इसका वजन करीब 150 टन है।इसे दक्षिणमुखी बनाया गया है, जो प्रभु श्रीनाथजी और विश्वास स्वरूपम की ओर प्रणाम की मुद्रा में है।
निर्माण में अपनाई गई अनोखी परंपरा
प्रतिमा के निर्माण के दौरान कोई बाधा न आए, इसके लिए 3 साल तक हर रोज सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। प्रतिमा की स्वर्णिम चमक लंबे समय तक बनी रहे, इसके लिए थाइलैंड से विशेष गोल्ड कलर मंगवाया गया है, जिससे यह दूर से भी सुनहरी चमक बिखेरती नजर आएगी। माना जाता है कि यह प्रतिमा 30 किलोमीटर दूर से भी साफ दिखाई देगी।
क्यों बनाई गई दक्षिणमुखी प्रतिमा?
मूर्तिकार नरेश कुमावत के अनुसार, जब प्रभु श्रीनाथजी ब्रज से मेवाड़ पधारे, तब सभी देवी-देवता भी उनकी सेवा में साथ आए। इसी आस्था के चलते हनुमानजी की प्रतिमा को श्रीनाथजी और शिव प्रतिमा की ओर मुख करके स्थापित किया गया है। शास्त्रों के अनुसार दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा अत्यंत फलदायी और रक्षक मानी जाती है।
निर्माण की चुनौतियां
पहाड़ी पर तेज हवा के कारण क्रेन खड़ी करना भी बेहद मुश्किल था। हर समय हादसे का खतरा बना रहता था। इसके बावजूद आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना का इस्तेमाल कर प्रतिमा को सफलतापूर्वक तैयार किया गया।
मूर्तिकार कौन हैं?
इस भव्य प्रतिमा को प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत ने बनाया है। कुमावत देश-विदेश में 6000 से अधिक मूर्तियां बना चुके हैं। उन्होंने कनाडा, न्यू पार्लियामेंट, सुप्रीम कोर्ट और अयोध्या राम मंदिर में भी काम किया है।
धार्मिक पर्यटन को नई दिशा
प्रतिमा निर्माण से जुड़े गिरीश रतिलाल शाह ने बताया कि यह प्रतिमा नाथद्वारा में आस्था का नया केंद्र बनेगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी। नाथद्वारा में पहले से ही 369 फीट ऊंची विश्वास स्वरूपम शिव प्रतिमा मौजूद है, जिसका लोकार्पण तीन साल पहले हुआ था। अब हनुमान प्रतिमा के साथ यह क्षेत्र और भी पवित्र और आकर्षक बन गया है।



