Private Bus Strike: आरटीओ की निजी बसों पर कार्रवाई के विरोध में प्रदेश भर में बसों के पहिए थम गए हैं। बस ऑपरेटर्स ने सोमवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। सरकार की ओर से बस ऑपरेटर्स को बातचीत के लिए फिर बलाया है। मंगलवार को वार्ता होने की संभावना है हालांकि सोमवार को हुई बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी थी। दरअसल सरकार निजी बस ऑपरेटर्स की हडताल को जल्द खत्म करना चाहती है इसका सबसे बडा कारण अजमेर में 28 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी की आम सभा है जिसमें लोगों को लाने ले जाने के लिए अजमेर जिला प्रशासन सहित अन्य जिलों में बसें नहीं मिल रही हैं।
बंद का असर
बस ऑपरेटर्स का दावा है कि प्रदेश की करीब 35 हजार कॉन्ट्रैक्ट कैरिज, स्टेट कैरिज और लोक परिवहन बसों का संचालन बंद हो गया है। सिंधी कैंप बस स्टैण्ड के बाहर से जाने वाली निजी बसें नहीं मिलने से खाटूश्याम, सीकर, चुरु जाने वाले हजारों यात्री परेशान देखे गए हैं। रोडवेज बसें भर कर चल रही हैं। जयपुर सहित कई शहरों में मंगलवार सुबह से हडताल का इसका असर दिख रहा है। हालांकि, जोधपुर में निजी बसें चलने की खबरें मिली हैं।
टैक्सी ऑपरेटर्स समर्थन में
टैक्सी ऑपरेटर्स ने भी बस हड़ताल को समर्थन दिया है। जयपुर में रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व शहर से बाहर जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी भी नहीं मिल रही हैं। इधर, रोडवेज बसों में मंगलवार सुबह यात्री भार बढ़ गया है।
चक्काजाम की धमकी
ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने बताया कि सोमवार को उन्हें सचिवालय में वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन बातचीत में कोई सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से आरसी सस्पेंड की गई बसों की सूची मंगवाई गई है और मंगलवार को फिर बातचीत होगी। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो बस ऑपरेटर्स सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे।
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पुरानी बसों में धारा 153 में चालान करना सही नहीं
बस ऑपरेटर्स का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 में भारी-भरकम चालान बनाए जा रहे हैं। यह धारा साल 2025 में जोड़ी गई है। ऐसे में जो पुरानी बस हैं, उन्हें इस धारा के मुताबिक चालान करना उचित नहीं है।
बसों के मामले में यह धारा तब लगाई जाती है, जब वाहन की बॉडी में बिना अनुमति बदलाव किया गया हो। ओवरलोडिंग या सेफ्टी नियमों का उल्लंघन हो। फिटनेस सर्टिफिकेट की शर्तों का पालन नहीं हो रहा हो। डिजाइन या स्ट्रक्चर (जैसे ऊंचाई, लंबाई, ओवरहैंग आदि) तय मानकों के मुताबिक न हो ।
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