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Gen Z की ईयरबड्स लाइफस्टाइल बन रही Hearing Loss की वजह? जानिए कितना खतरनाक है दिनभर हेडफोन लगाना

Genz and Earbuds

Lifestyle- युवा पीढ़ी की जीवनशैली में ईयरबड्स और हेडफोन का इस्तेमाल एक आम बात हो गई है| लेकिन यह साइलेंट खतरा बन सकता है।। सुबह उठते ही म्यूजिक मेट्रो में सफर करते वक्त पॉडकास्ट कॉलेज में ऑनलाइन क्लास कैफे में बैठकर कॉल और रात को रील्स देखते समय फिर से ईयरबड्स—पूरे दिन कानों में हेडफोन लगे रहते हैं। टेक्नोलॉजी ने जिंदगी आसान बना दी है|लेकिन यही आदत अब सुनने की क्षमता के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है| WHO(World Health organisation) के अनुसार इन आदतों के कारण दुनिया भर में करीब एक अरब युवा हियरिंग लॉस के खतरे में हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लगातार तेज आवाज में म्यूजिक सुनना और घंटों तक ईयरबड्स लगाए रखना आने वाले समय में Permanent Hearing Loss की वजह बन सकता है।

ईयरबड्स या हेडफोन: कौन ज्यादा नुकसान करता है

युवा पीढ़ी में ईयरबड्स ज्यादा पॉपुलर हैं क्योंकि ये छोटे स्टाइलिश और पॉकेट में आसानी से रखे जा सकते हैं। लेकिन यही ईयरबड्स सबसे ज्यादा खतरनाक भी साबित हो रहे हैं। हेडफोन जहां कान के बाहर रहते हैं, वहीं ईयरबड्स सीधे कान के अंदर लगाए जाते हैं और बहुत कम दूरी से तेज आवाज पहुंचाते हैं। लोग ट्रैफिक मेट्रो या भीड़-भाड़ में म्यूजिक साफ सुनने के लिए वॉल्यूम और बढ़ा देते हैं। इससे कानों पर सीधा दबाव पड़ता है।

तेज आवाज कानों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

मणिपाल हॉस्पिटल की रिपोर्ट के अनुसार जब तेज आवाज कान में जाती है तो ध्वनि तरंगें कान के पर्दे को कंपन कराती हैं और यह कंपन अंदरूनी कान के कोक्लिया तक पहुंचता है| जहां हजारों सूक्ष्म हेयर सेल्स होती हैं। लगातार तेज आवाज इन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। समय के साथ ये सेल्स अपनी संवेदनशीलता खो देती हैं या स्थायी रूप से खराब हो जाती हैं। यही स्थिति शोर-प्रेरित श्रवण हानि कहलाती है|जो आगे चलकर परमानेंट बन सकती है।

युवा पीढ़ी में दिख रहे शुरुआती खतरे के संकेत
आज कई युवा कानों में घंटी बजने जैसी आवाज की शिकायत कर रहे हैं| जिसे टिनिटस कहा जाता है कुछ को सामान्य आवाज भी बहुत तेज लगने लगती है जिसे हाइपरएक्यूसिस कहते हैं इसके अलावा बार-बार कान दर्द चक्कर आना ज्यादा ईयरवैक्स जमा होना और इंफेक्शन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ईयरबड्स को शेयर करना और बिना साफ किए दोबारा इस्तेमाल करना इन परेशानियों को और बढ़ा देता है।

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लाइफस्टाइल बदले बिना नहीं बचेगी सुनने की ताकत

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवा पीढ़ी को अपनी सुनने की आदतों में बदलाव करना होगा। म्यूजिक हमेशा मध्यम वॉल्यूम पर सुनें और लंबे समय तक लगातार ईयरबड्स न लगाएं। नॉइज-कैंसिलिंग या ओवर-द-ईयर हेडफोन बेहतर विकल्प हो सकते हैं क्योंकि इनमें वॉल्यूम ज्यादा बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। ईयरबड्स को नियमित रूप से साफ करना और किसी के साथ शेयर न करना भी जरूरी है। सफर या ज्यादा शोर वाले माहौल में ईयरफोन लगाने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष

युवा पीढ़ी के लिए ईयरबड्स सिर्फ गैजेट नहीं बल्कि उनकी पहचान बन चुके हैं। लेकिन अगर यही आदत कंट्रोल में नहीं आई तो कम उम्र में ही सुनने की क्षमता में गभीर समस्या सामने आ सकती है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जरूरी है लेकिन अपनी सेहत की कीमत पर नहीं। थोड़ी-सी सावधानी आपके कानों को जीवनभर सुरक्षित रख सकती है।

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