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AI जनरेटेड कंटेंट पर होगा लेबल लगाना जरुरी, Tech कंपनियों की आपत्ति के बाद केन्द्र सरकार ने बदले नियम

AI and social media

AI Technology: सोशल मीडिया पर डाला जाने वाला AI-जनरेटेड कंटेंट स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना जरूरी होगा, इस संबंध में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियम जारी किए हैं।

नए नियम आसान भाषा में समझें

पहले ऐसा प्रावधान था, जिस पर कई सोशल मीडिया और AI प्लेटफॉर्म्स ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे उनका मूल कंटेंट दब सकता है या ठीक से दिखाई नहीं देगा। नए नियम 20 फरवरी से लागू होंगे, जो ‘इंडिया एआई समिट’ का आखिरी दिन भी है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, टेक कंपनियों की आपत्तियों के बाद ही कुछ संशोधन किए गए हैं।

गैरकानूनी पोस्ट, तीन घंटे में हो एक्शन

सबसे अहम बदलाव समय सीमा को लेकर है। केन्द्र सरकार ने नियमों में स्पष्ट किया है कि यदि AI के जरिए कोई आपत्तिजनक या गैरकानूनी कंटेंट पोस्ट किया जाता है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। यह नियम केवल AI-जनरेटेड कंटेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी ऐसे कंटेंट पर लागू होगा, जो कानून के तहत अवैध माना जाता है। बिना सहमति साझा की गई निजी तस्वीरों को अब दो घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा, जबकि पहले इसके लिए 24 घंटे की समयसीमा थी।

टेक कंपनियां खुश या नाराज?

टेक कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती अनुपालन (कम्प्लायंस) का बढ़ता बोझ है। यदि वे तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं करतीं, तो उनका ‘सेफ हार्बर’ दर्जा खत्म हो सकता है। यही वह कानूनी सुरक्षा है, जो यूज़र द्वारा अपलोड की गई सामग्री के लिए कंपनियों को कानूनी कार्रवाई से बचाती है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि समय सीमा इसलिए घटाई गई है ताकि विवादित कंटेंट के वायरल होने से पहले ही उस पर रोक लगाई जा सके। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा कि अब टेक कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है और उनके पास तेजी से कार्रवाई करने के लिए जरूरी संसाधन पहले से मौजूद हैं।

एक्सपर्ट सरकार की नीति पर क्या बोले?

इस संबंध में विशेषज्ञ का कहना है कि व्यवहारिक तौर पर किसी कंटेंट के गैरकानूनी होने का तुरंत आकलन करना आसान नहीं होता। कई बार कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की सूचनाएं भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होतीं। ऐसे में बेहद कम समय में ठोस कार्रवाई की अपेक्षा करना मुश्किल है और इससे जरूरत से ज्यादा सेंसरशिप का खतरा भी बढ़ सकता है।

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सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन क्या है?

नियमों में कुछ राहत भी दी गई है। ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ की परिभाषा में अब कुछ अपवाद जोड़े गए हैं। यदि AI का उपयोग केवल सहायक या गुणवत्ता सुधार के लिए किया गया है, तो उसे इस दायरे से बाहर रखा जाएगा। ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल कंटेंट की सामान्य एडिटिंग को भी एसजीआई की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा।

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टेक कंपनियों को कड़े निर्देश

इसके अलावा, यदि किसी टेक कंपनी को यह पता चलता है कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल एसजीआई बनाने या फैलाने में किया जा रहा है, तो उसे तुरंत उचित कार्रवाई करनी होगी। कंपनियों को ऐसी सामग्री की पहचान और जांच के लिए उपयुक्त तकनीकी उपाय अपनाने होंगे। साथ ही, AI-जनरेटेड कंटेंट पर स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल या नोटिस प्रदर्शित करना भी अनिवार्य होगा।

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