Yogi Adityanath: यूपी सरकार ने राज्य के सभी मदरसों के वित्तीय लेन-देन की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है. इस जांच का उद्देश्य मदरसों को मिलने वाली विदेश फंडिंग के स्त्रोतों का पता लगाना है. मदरसा संचालकों के निजी बैंक खातों की भी समीक्षा की जाएगी. एजेंसियां सरकार के निर्देश पर मदरसों और उनके संचालकों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालेंगी, ताकि किसी भी संदिग्ध लेनदेन या अवैध फंडिंग की जानकारी सामने लाई जा सके. कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने यूपी के मदरसों की वित्तीय जांच पर कहा कि कितनी बार इस बात पर आप बयान देंगे? पिछले 8 साल में 10 बार इस बयान को सुन चुके हैं. यह बयान देने की आवश्यकता क्या है? कोई भी वित्तीय अनियमितता होगी तो सरकार जांच करेगी, कौन सी बड़ी बात है. 8 बार से 10 बार से हम लोग इस बात को सुन रहे हैं कि मदरसा बोर्ड की जांच होगी, मदरसों की जांच होगी. अरे भाई करिए न जांच, किसने रोक रखा है? आप सिर्फ और सिर्फ बयानबाजी करने के लिए हैं.
“फर्जी और फिजूल की बयानबाजी करते हैं”
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि आप बात बहादुर हैं, आप काम बहादुर नहीं हैं. आप सिर्फ इस तरीके की बयानबाजी करके हिंदू-मुसलमान करना चाहते हैं, मंदिर-मस्जिद करना चाहते हैं, मस्जिदों के नीचे मंदिर खोजना चाहते हैं. आप एक वर्ग को सिर्फ डरावा दिखाने के लिए कहीं न कहीं आप इस तरीके की फर्जी और फिजूल की बयानबाजी करते हैं जिसका कोई औचित्य नहीं है. जहां भी अनियमितता होगी, वहां जांच होगी.
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“कोई गाली देकर कोई धर्मांतरण कराता है क्या”
वहीं यूपी के बस्ती जिले में धर्मांतरण और महिलाओं के उत्पीड़न के मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि कोई गाली देकर कैसे किसी को धर्मांतरण के लिए मजबूर कर सकता है? उत्तर प्रदेश की पुलिस और उत्तर प्रदेश का शासन और उत्तर प्रदेश की भाजपा बड़ी गजब हो गई है. कोई गाली देकर कोई धर्मांतरण कराता है क्या? कभी आज तक किसी ने ऐसा सुना हो. कम से कम पुलिस वालों या भाजपा वालों थ्योरी तो सही लाओ.
“मदरसा को फंड बड़े पैमाने पर मिलता है”
यूपी के मदरसों की वित्तीय जांच पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि मदरसा को फंड बड़े पैमाने पर मिलता है. मुसलमान बड़े पैमाने पर फंड देते हैं इसकी मुख्य वजह यह है कि वहां पढ़ने वाले बच्चे गरीब घर के होते हैं. अमीर मुसलमान गरीबों को इस तरह मदद करते हैं. ईद या अन्य त्योहार पर गरीब के घर भी खुशियां आएं इसलिए मुसलमान फंड देते हैं. यह अच्छी बात है न. अगर विदेशी फंडिंग होती है तो पहले यह भी देखिए कि आरएसएस को फंडिंग कहां से होती है. बड़े पैमाने पर बाहर से फंडिंग होती है। अगर आरएसएस की देखेंगे तो मदरसों को भी देखिए. आरएसएस को पूरी छूट और सिर्फ मदरसों की देखेंगे. यह गलत बात है. यह हर समय मुसलमानों के खिलाफ कुछ न कुछ करते रहते हैं.



