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भजनलाल सरकार के फैसले से छलके हेमाराम चौधरी के आंसू

Bhajanlal Sharma

Bhajanlal Sharma: भजनलाल सरकार के एक फैसले ने पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और बालोतरा इलाकों में सियासी माहौल गरमा दिया है। जिलों की सीमा बदलते ही लोग नाराज़ हो गए हैं। कांग्रेस इसे बदले की राजनीति बता रही है, जबकि भाजपा कह रही है कि यह फैसला आम लोगों की सुविधा के लिए लिया गया है।

सरकार ने क्या बदलाव किया?

सरकार ने फैसला किया है कि बायतू अब बालोतरा जिले में नहीं रहेगा और फिर से बाड़मेर जिले में शामिल होगा। वहीं गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा जिले में जोड़ दिया गया है। इस बदलाव के बाद इलाके के लोगों में भ्रम और नाराज़गी दोनों देखने को मिल रही है। फैसले के खिलाफ धोरीमन्ना उपखंड मुख्यालय पर लोग धरने पर बैठ गए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी भी स्थानीय लोगों के साथ धरने में शामिल हुए। उनका कहना है कि यह फैसला लोगों की भावनाओं के खिलाफ है।

हेमाराम चौधरी हुए भावुक

मीडिया से बात करते वक्त हेमाराम चौधरी भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा, “हम आखिरी सांस तक इस फैसले का विरोध करेंगे।”
दूसरी तरफ सरकार ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। गुड़ामालानी और धोरीमन्ना में सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और इमारतों पर ‘जिला बालोतरा’ लिखवाने का काम शुरू हो चुका है। इससे साफ है कि सरकार इस फैसले पर दोबारा सोचने वाली नहीं है।

कांग्रेस ने बताया गलत फैसला

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस फैसले को “तुगलकी फरमान” कहा है। उनका कहना है कि यह फैसला राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया है और इससे पश्चिमी राजस्थान का विकास प्रभावित होगा। बायतू विधायक और एमपी कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने आरोप लगाया है कि एक खास जाति को निशाना बनाकर यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज में गलत संदेश देता है।

भाजपा का जवाब

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के सभी आरोपों को गलत बताया है। भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा का कहना है कि कांग्रेस हर फैसले का विरोध करती है। उनके मुताबिक यह बदलाव प्रशासनिक सुविधा और स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखकर किया गया है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार की तरफ से कोई नया बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से जमीन पर बदलाव किए जा रहे हैं, उससे साफ है कि सरकार का फैसला फिलहाल अंतिम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि लोगों के विरोध का सरकार पर क्या असर पड़ता है।

 

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