स्टडी में क्या पाया गया?
- Centre for Cellular and Molecular Biology (CCMB), हैदराबाद और Tata Institute for Genetics and Society (TIGS), बेंगलुरु के रिसर्चर्स ने शहर के 17 लोकेशन्स से सैंपल लिए – जिसमें 10 खुले नाले, मूसी नदी के कुछ हिस्से और बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों के 2 किमी दायरे में स्थित ड्रेन शामिल थे।
- अस्पतालों के पास के नालों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन (ARGs) की विविधता और मात्रा काफी अधिक पाई गई, खासकर आम दवाओं जैसे एजिथ्रोमाइसिन और टेट्रासाइक्लिन के खिलाफ।
- स्टडी में लगभग 89 पैथोजेंस (बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया) पहचाने गए, जो लगातार विकसित हो रहे हैं। इनमें E. coli, Klebsiella pneumoniae, Pseudomonas aeruginosa जैसे WHO प्रायोरिटी ऑर्गेनिज्म शामिल हैं, जो UTI, निमोनिया, पेट के इंफेक्शन जैसी बीमारियां फैला सकते हैं।
- अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ताकतवर एंटीबायोटिक्स के अवशेष (residues) बैक्टीरिया को मारने के बजाय उन्हें और मजबूत बना रहे हैं, क्योंकि कम मात्रा में एक्सपोजर से बैक्टीरिया रेजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं।
क्यों है यह समस्या गंभीर?
अस्पतालों में सबसे ज्यादा और सबसे मजबूत एंटीबायोटिक्स इस्तेमाल होते हैं। फर्श धोने, लॉन्ड्री और अन्य वेस्ट वॉटर से निकलने वाले अवशेष बिना पूरी तरह साफ हुए नालों में पहुंच जाते हैं। हैदराबाद की ड्रेनेज सिस्टम में ज्यादातर सीवेज अनट्रीटेड ही बहता है, जो नदी और ग्राउंडवाटर को दूषित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सीवेज मैनेजमेंट में सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में सामान्य इंफेक्शन का इलाज भी मुश्किल हो जाएगा – इसे ‘साइलेंट पैनडेमिक’ कहा जा रहा है।क्या किया जा सकता है?अस्पतालों में एडवांस्ड वेस्टवाटर ट्रीटमेंट प्लांट (जैसे एंटीबायोटिक रिमूवल टेक्नोलॉजी) अनिवार्य करना।
शहर की ड्रेनेज और STP सिस्टम को अपग्रेड करना।
नियमित वेस्टवाटर सर्विलांस और AMR मॉनिटरिंग बढ़ाना।
यह स्टडी हाल ही में प्रकाशित हुई है और पब्लिक हेल्थ के लिए चेतावनी का काम कर रही है। हैदराबाद जैसे घनी आबादी वाले शहरों में AMR अब पर्यावरण में फैल चुका है – समय रहते एक्शन जरूरी है।



